12 करोड़ की कैथ लैब बनकर तैयार, पर इलाज शुरू नहीं! जमशेदपुर के हार्ट मरीज बेबस, भगवान भरोसे
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में 12 करोड़ की लागत से तैयार कैथ लैब का संचालन शुरू नहीं हो पाया है, जिससे हृदय रोगियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी जीवन रक्षक सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज का खर्च लाखों में आता है। डॉक्टरों और तकनीशियनों की नियुक्ति न होने के कारण यह अत्याधुनिक लैब बेकार पड़ी है, जो खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है।
कई मरीज अपनी व्यथा सुनाते हुए बताते हैं कि यदि एमजीएम में यह सुविधा उपलब्ध होती, तो वे अपना जीवन बचा पाते। अस्पताल के आंकड़े चिंताजनक हैं, हर साल कम से कम 200 गंभीर कार्डियक मरीजों को तत्काल इलाज के लिए बाहर भेजना पड़ता है। एंजियोग्राफी का सामान्य खर्च 10-15 हजार रुपये और एंजियोप्लास्टी का 1.5-2 लाख रुपये आता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में यह सुविधा न होना गरीबों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। सवाल यह उठता है कि जब कैथ लैब का ढांचा तैयार है, तो जनता को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा?
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पिछले साल निरीक्षण के बाद कैथ लैब को जल्द चालू करने की सिफारिश की थी, लेकिन कार्रवाई की गति बेहद धीमी है। भवन तैयार होने के बावजूद मशीनों की इंस्टॉलेशन अधूरी है और विशेषज्ञों की नियुक्ति लंबित है। कैथेटराइजेशन लैब वह महत्वपूर्ण यूनिट होती है जहां हृदय और रक्त वाहिकाओं की उन्नत जांच और तत्काल उपचार किया जाता है। एंजियोग्राफी से धमनियों में अवरोध का पता चलता है, जबकि एंजियोप्लास्टी से अवरुद्ध धमनियों को खोलकर मरीज की जान बचाई जाती है। हार्ट अटैक के मामलों में हर मिनट कीमती होता है, इसलिए ऐसे सरकारी अस्पताल में कैथ लैब का चालू होना हजारों मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकता है।
एमजीएम प्रिंसिपल डॉ. दिवाकर हांसदा ने बताया कि कैथ लैब शुरू करने के संबंध में विभाग गंभीर है और इसका प्रस्ताव मेडिसिन विभागाध्यक्ष से मांगा गया है, जिसे आगे भेजा जाएगा। उम्मीद है कि जल्द ही मरीजों को इसका लाभ मिलने लगेगा।
