कानपुर में कैंसर वाला कचरा: 20 किमी तक फैला क्रोमियम, 16 रुपये/KG बचाने के लिए मौत का खेल
कानपुर में क्रोमियम कचरा उत्पन्न करने वाली फैक्ट्रियों की मनमानी सामने आई है। ड्योढ़ी घाट मोड़ से सलेमपुर तक लगभग 20 किलोमीटर के दायरे में क्रोमियम का कचरा फैलाया गया है। बारिश के पानी के साथ यह जहर आसपास के जलाशयों में मिलकर उन्हें दूषित कर रहा है। पुरवामीर में क्रोमियम कचरा फेंकने का मामला सामने आने के बाद, रूमा से ड्योढ़ी घाट जाने वाले लिंक मार्ग के किनारे नाले के पास महीनों से 50 से अधिक ट्रक क्रोमियम कचरा फेंका जा रहा है। यह सिलसिला 20 किलोमीटर तक फैला हुआ है।
फैक्ट्री संचालक प्रति किलो 16 रुपये की लागत बचाने के लिए मात्र 2.5 रुपये प्रति किलो की दर से इस जहरीले कचरे को फेंकवा रहे हैं। इस लालच में स्थानीय युवक भी कचरा फेंककर अपनी जेब भर रहे हैं। इस तरह, वे चंद रुपयों के लिए जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
क्रोमियम कचरे के संपर्क में आने से कैंसर, फेफड़ों की गंभीर समस्याएं और त्वचा के अल्सर जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। हेक्सावेलेंट क्रोमियम सांस के जरिए फेफड़ों, नाक और साइनस के कैंसर को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा, यह डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे एनीमिया और थकान जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह किडनी और लिवर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
यह जहरीला कचरा मुख्य रूप से चमड़ा उद्योग (टैनरी), इलेक्ट्रोप्लेटिंग और बेसिक क्रोम सल्फेट (BCS) बनाने वाली इकाइयों से निकलता है। चमड़ा फैक्ट्रियों में खाल की टैनिंग के लिए क्रोमियम का उपयोग होता है, जबकि इलेक्ट्रोप्लेटिंग में धातुओं पर कोटिंग के लिए। केमिकल फैक्ट्रियां भी इसके बड़े स्रोत हैं।
