UP विधानसभा में पेश CAG रिपोर्ट: GDA अफसरों की लापरवाही से 469 करोड़ का नुकसान, गरीबों के मकान भी नहीं बने | GDA news
उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पेश की गई, जिसने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, GDA के अफसरों की लापरवाही के कारण प्राधिकरण को कुल 469 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। यह नुकसान प्रशासनिक शुल्क, भूमि मूल्य, भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क और इंफ्रास्ट्रक्चर अधिभार की वसूली न करने तथा मानचित्र शुल्क में अनुचित लाभ देने जैसे विभिन्न मदों में हुआ है। इस रिपोर्ट ने शहरी विकास और जनता के प्रति GDA की जवाबदेही पर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
CAG रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बिल्डरों से 21.86 करोड़ रुपये के प्रशासनिक प्रभार, भूमि मूल्य और भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की वसूली नहीं की गई। इसी तरह, 422 आवंटियों पर 154.02 करोड़ रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर अधिभार नहीं लगाया गया। इसके अतिरिक्त, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास शुल्क और मानचित्र शुल्क कम लगाए जाने से 25.69 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ दिया गया, जिससे GDA को सीधा नुकसान हुआ।
गरीबों के आवास निर्माण में भारी चूक
CAG की ऑडिट रिपोर्ट (वर्ष 2017-18 से 2021-22) में सबसे चौंकाने वाले खुलासों में से एक दुर्बल आय वर्ग (EWS) के लिए मकानों के निर्माण में GDA की विफलता है। प्राधिकरण को 2017 से 2022 के बीच 25 हजार मकान बनाने थे, लेकिन केवल 9960 ही बनाए गए, जो लक्ष्य का मात्र 40 प्रतिशत है। इंटीग्रेटेड व हाईटेक टाउनशिप योजना में बिल्डरों को दुर्बल वर्ग के लिए 20 प्रतिशत मकान बनाने थे, जिसमें 6382 के लक्ष्य के मुकाबले मार्च 2022 तक केवल 2133 मकान ही बने। प्रधानमंत्री आवास योजना में भी 45 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष 20173 मकान ही बन पाए। GDA ने इन लापरवाहियों के बावजूद बिल्डरों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
मास्टर प्लान और अवैध निर्माण पर सवाल
रिपोर्ट में GDA के मास्टर प्लान बनाने में भी गंभीर लापरवाही पाई गई है। 1200 करोड़ की अनुमानित लागत से प्रस्तावित हिंडन एलिवेटेड सड़क को मास्टर प्लान में शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा, पूरे क्षेत्र के लिए एक मास्टर प्लान होने के बजाय गाजियाबाद और मोदीनगर के लिए अलग-अलग मास्टर प्लान बनाए गए, जिससे योजनाओं को तैयार करने में चार से 10 साल की देरी हुई। GDA मास्टर प्लान को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड से पास कराने में भी विफल रहा।
अवैध निर्माण रोकने की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाए गए हैं। हिंडन नदी के किनारे बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण को नहीं रोका गया, जिससे वहां घनी आबादी बस गई। अवैध निर्माणकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई भी बेहद खराब पाई गई, जिसमें केवल 19 से 65 प्रतिशत मामलों में ही कार्रवाई हुई। बोर्ड के निर्देशों के बावजूद ध्वस्तीकरण किए बिना शमनित नक्शे जारी कर दिए गए।
राजस्व वसूली और भूमि अधिग्रहण में भी कमी
GDA वर्ष 2017-18 से 2021-22 के दौरान लक्ष्य के मुताबिक राजस्व प्राप्त नहीं कर सका। वर्ष 2018-19 में केवल 40 से 58% ही कमाई हो पाई। अधिकारियों ने इसके लिए संपत्तियों की बिक्री में कमी, शमन फीस, नक्शा शुल्क और कोरोना महामारी को जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आवासीय और औद्योगिक गतिविधियों के लिए 300 हेक्टेयर भूमि की व्यवस्था करनी थी, लेकिन केवल 18.32 हेक्टेयर ही अधिग्रहित की गई। संपत्तियों के आवंटन में भी गड़बड़ी पाई गई है, जहां पिछली नीलामी में बिकी हुई संपत्तियों को आगे के आवंटन में शामिल नहीं किया गया।
GDA बोर्ड की बैठक और आगे की कार्रवाई
गुरुवार को हुई GDA की बोर्ड बैठक में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक की CAG ऑडिट रिपोर्ट का अवलोकन किया गया। इस रिपोर्ट में प्राधिकरण के कई कार्यों और खामियों का जिक्र करते हुए उन्हें सुधारने के सुझाव दिए गए हैं। मेरठ मंडलायुक्त ने रिपोर्ट पर चर्चा के बाद GDA को इसका उचित जवाब भेजने के निर्देश दिए हैं। GDA सचिव विवेक मिश्रा ने कहा कि बोर्ड बैठक में CAG ऑडिट रिपोर्ट पर चर्चा हुई है और प्राधिकरण उन बिंदुओं का पालन करेगा तथा अपना जवाब तैयार कर भेजेगा।
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