लखनऊ में बिजली चोरी जांच के लिए बॉडी वार्न कैमरा अनिवार्य, भ्रष्टाचार पर लगेगा अंकुश
लखनऊ में बिजली चोरी रोकने के लिए की जाने वाली चेकिंग प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए गए हैं। विभाग में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अब बॉडी वार्न कैमरे का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। निदेशक वाणिज्य द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यदि कैमरा खराब है या उपलब्ध नहीं है, तो चेकिंग की कार्रवाई रोकनी होगी। विभाग ने इस नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। विजिलेंस टीम के उप-निरीक्षक और विभागीय टीम के जेई या एसडीओ को कैमरा पहनना अनिवार्य होगा। चेकिंग पर जाने से पहले दफ्तर में कैमरा ऑन कर पूरी टीम का परिचय रिकॉर्ड करना होगा।
उपभोक्ता के घर पहुंचने से लेकर उपकरणों की जाँच और रिपोर्ट देने तक की पूरी प्रक्रिया को शूट किया जाएगा। यदि उपभोक्ता रिपोर्ट लेने से मना करता है, तो उसे दीवार पर चस्पा करते हुए वीडियो बनाना होगा। रिकॉर्डिंग को कंप्यूटर सर्वर पर अपलोड किया जाएगा, जो वहां 20 दिनों तक सुरक्षित रहेगी। कैमरे की मेमोरी से डेटा डिलीट करने के लिए मुख्य अभियंता की लिखित अनुमति आवश्यक होगी। इस अभियान के लिए विभाग ने कुल 300 कैमरे खरीदे हैं। इनमें से सबसे अधिक 92 कैमरे मध्यांचल निगम को आवंटित किए गए हैं, ताकि चेकिंग के दौरान होने वाले विवादों और अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके। इस नई तकनीक के लागू होने से उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी और वे अनुचित कार्रवाई से बच सकेंगे।
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