Bijwasan Rail Terminal project को मिली हरी झंडी, 1279 पेड़ों को हटाने की मंजूरी
दिल्ली में निर्माणाधीन बिजवासन रेल टर्मिनल परियोजना को एक बड़ी सफलता मिली है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने टर्मिनल के निर्माण के रास्ते में आ रहे 1279 पेड़ों को हटाने की मंजूरी दे दी मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी परियोजना के क्रियान्वयन में आ रही अंतिम बाधा को दूर करती है, जिससे टर्मिनल का काम तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
पेड़ों को हटाने और ट्रांसप्लांट करने की योजना
CEC के निर्देशानुसार, 1279 पेड़ों में से 496 पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाएगा। इन पेड़ों को बिजवासन में ही उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा। शेष 783 पेड़ों को हटाने की अनुमति मिली है, जिसके बदले में दिल्ली के नरेला और बादली रेलवे स्टेशनों के बीच उपयुक्त स्थान पर प्रतिपूर्ति के तौर पर नए पेड़ लगाए जाएंगे। रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने शुरुआत में 1293 पेड़ों को हटाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन CEC ने समीक्षा के बाद यह संख्या 1279 कर दी।
परियोजना का महत्व और उद्देश्य
Bijwasan Rail Terminal को पश्चिमी भारत से आने वाली ट्रेनों के लिए दिल्ली का प्रवेश द्वार माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बढ़ते ट्रैफिक लोड को कम करना है। नई दिल्ली स्टेशन के आधुनिकीकरण की योजना है, लेकिन वर्तमान में अत्यधिक ट्रैफिक के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। बिजवासन टर्मिनल इस लोड को काफी कम कर देगा।
कनेक्टिविटी और भविष्य की योजनाएं
यह टर्मिनल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यह द्वारका अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के पास है, जहां से पश्चिमी भारत की ओर जाने वाली बसों का आवागमन होगा। टर्मिनल दो मुख्य सड़कों के बीच स्थित है: एक द्वारका-गुरुग्राम मार्ग (जो यूईआर और द्वारका एक्सप्रेसवे से जुड़ा है) और दूसरी एयरपोर्ट की दीवार से सटी सड़क। यह एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन मेट्रो स्टेशन से भी जुड़ा हुआ है, जिससे यात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।
