धान खरीद (Dhan Kharid) में बड़ा घोटाला, ठगे गए किसान; आखिरी समय में हुआ खेल
जिले में धान खरीद के मामले में इस बार क्रय केंद्रों पर जमकर खेल हुआ है। सरकार ने किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने का दावा किया था, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही निकली। पंजीकरण कराने वाले आधे से अधिक किसानों से धान की खरीद नहीं हो सकी, जबकि कड़ाके की सर्दी में किसान अपनी ट्रालियों पर धान लादकर तौल के इंतजार में डेरा डाले रहे।
परेशान किसानों का फायदा उठाते हुए व्यापारियों ने उनका धान कम कीमत पर खरीद लिया। इसके बाद इन व्यापारियों ने केंद्र प्रभारियों से सांठगांठ कर किसानों के कागजात का इस्तेमाल किया और सरकारी दर पर धान बेचकर मुनाफा कमाया। विभागीय आंकड़ों में आखिरी दिनों में आई तेजी इस बात की गवाही देती है कि खरीद प्रक्रिया में बड़े स्तर पर धांधली हुई है।
इस साल जिले में 2369 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 68000 एमटी धान खरीद का लक्ष्य रखा गया था, जिसके लिए 56 क्रय केंद्र बनाए गए थे। 19571 किसानों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया था। लेकिन सिस्टम की नाकामी के चलते किसान कभी बोरों की कमी तो कभी धान की उठान न होने के कारण परेशान रहे। 13 जनवरी तक 72 दिनों में जहां केवल 38467.62 एमटी धान की खरीद हो पाई थी, वहीं अगले 15 दिनों में 549435 एमटी धान की खरीद कर ली गई। इससे लक्ष्य का 81 फीसदी पूरा हो गया।
डिप्टी आरएमओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि अब तक 9838 किसानों से 54935 एमटी धान की खरीद हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अब खाद्य विभाग के केंद्रों पर दो क्विंटल और अन्य केंद्रों पर 50 से 100 क्विंटल तक ही खरीद करने का निर्देश मिला है। केंद्र प्रभारियों को पहले से मौजूद किसानों की ही तौल करने का निर्देश दिया गया है।
