मिर्जापुर में अदाणी की परियोजना पर बड़ा फैसला, 5.38 रुपये/यूनिट की दर स्वीकृत
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में अदाणी समूह की 1500 मेगावॉट की तापीय परियोजना के पावर सप्लाई एग्रीमेंट को नियामक आयोग ने हरी झंडी दे दी है। आयोग ने ₹5.38 प्रति यूनिट की दर को स्वीकार कर लिया है। यह परियोजना तब से चर्चा में है जब अदाणी समूह ने खुद स्वीकार किया कि फ्यूल गैस डीसल्फराइजेशन (एफजीडी) संयंत्र न लगाने के कारण कंपनी को लगभग 270 करोड़ रुपये की बचत हुई है। इस बचत का सार्वजनिक हित में सही आकलन करने के लिए आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को विस्तृत आदेश जारी किए हैं।
नियामक आयोग इस परियोजना के पावर सप्लाई एग्रीमेंट को अनुमोदित कराने के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा था। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि एफजीडी संयंत्र न लगाए जाने से होने वाली वास्तविक बचत का आकलन करना अत्यंत आवश्यक है। समूह द्वारा बताई गई 270 करोड़ रुपये की बचत को आयोग ने अंतिम नहीं माना है।
आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को निर्देश दिया है कि परियोजना की शुरुआत से लेकर उसके पूरा होने तक, प्रत्येक तिमाही में वास्तविक बचत का आकलन करके आयोग को रिपोर्ट सौंपी जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनता को वास्तविक लाभ के आधार पर राहत मिल सके। पावर कॉरपोरेशन ने पहले एफजीडी न लगाने से होने वाली बचत को छिपाने का प्रयास किया था, जिस पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई थी। आयोग ने कहा कि वह कोई ‘डाकघर’ या ‘केवल मोहर लगाने वाला प्राधिकरण’ नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के व्यापक हित में नियमों और कानूनों के दायरे में उचित निर्णय लेने के लिए बाध्य है।
इसके अतिरिक्त, आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को जीएसटी में कमी और अन्य कानूनी बदलावों के कारण ऊर्जा शुल्क में संभावित कमी पर भी नजर रखने का निर्देश दिया है।
उपभोक्ता परिषद की ओर से उठाए गए सवाल
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि अदाणी समूह ने एफजीडी न लगाने से हुई बचत की रकम को जानबूझकर कम बताया है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, एफजीडी की लागत 0.85 करोड़ रुपये से लेकर 1.20 करोड़ रुपये प्रति यूनिट तक हो सकती है, जिससे 1500 मेगावॉट के लिए 1750 करोड़ रुपये से अधिक की बचत संभव है। यह बचत पूंजीगत लागत में कमी लाएगी, जिससे फिक्स्ड कॉस्ट कम होगी और अंततः बिजली की दरों में कमी आनी चाहिए। उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से मांग की है कि वह 5.38 रुपये प्रति यूनिट की दर पर भी इस बचत की रकम के प्रभाव पर पुनर्विचार करे।
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