कानपुर देहात में भागवत कथा (Bhagwat Katha): आचार्य ने सुदामा चरित्र से बताया, गुरु-मित्र से छल का परिणाम
कानपुर देहात के गौरियापुर आश्रम में आयोजित भागवत कथा में आचार्य राजेश मिश्र ने सुदामा चरित्र की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य चाहे कितना भी बड़ा भक्त या कर्मयोगी क्यों न हो, यदि वह गुरु या मित्र से छल करता है, तो उसे इसका दंड अवश्य भुगतना पड़ता है। आचार्य ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य सखा सुदामा को भी बचपन में किए गए एक छोटे से छल के कारण दरिद्रता का दंश झेलना पड़ा था।
आचार्य ने कथा सुनाते हुए बताया कि बचपन में जब सुदामा और श्रीकृष्ण गुरु संदीपनी के आश्रम में शिक्षा ले रहे थे, तब गुरु माता ने दोनों को खाने के लिए चने दिए थे। सुदामा ने वे चने अपने सखा श्रीकृष्ण से छिपाकर अकेले खा लिए थे। आचार्य ने कहा कि निष्काम कर्मयोगी होने के बावजूद सुदामा को इसी छल के कारण दरिद्रता मिली। उन्होंने श्रोताओं से आह्वान किया कि वे श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का अनुकरण करें और जीवन में कभी भी गुरु या मित्र से छल न करें।
इस धार्मिक आयोजन के दौरान पंचकुंडीय श्री हरिहारात्मक महायज्ञ की पूर्णाहुति भी संपन्न हुई। यज्ञाचार्य राजनारायण त्रिपाठी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ को पूर्ण कराया। कार्यक्रम के अंतिम दिन अयोध्या, इंदौर और पनकी मंदिर के संतों ने भी यज्ञ में भाग लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की और कथा का श्रवण किया।
