भारत-यूएई व्यापार 9 लाख करोड़ पार, पक्की दोस्ती का नया अध्याय
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपने मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को एक नया आयाम देते हुए व्यापार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के तहत संयुक्त समिति की तीसरी बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े जारी किए गए, जो 100.06 अरब डॉलर (लगभग 9 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुंच गए हैं। यह पिछले वर्ष की तुलना में 19.6% की प्रभावशाली वृद्धि है, जो भारत के लिए यूएई को एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार के रूप में स्थापित करती है।
मंत्रालय के अनुसार, बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने मार्केट एक्सेस, डेटा शेयरिंग, गोल्ड टैरिफ-रेट कोटा (टीआरक्यू) के आवंटन, एंटी-डंपिंग मामले, सेवाओं का व्यापार और मूल नियमों (रूल्स ऑफ ऑरिजिन) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। भारत ने यूएई को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से गोल्ड टीआरक्यू आवंटित करने के हालिया निर्णय से भी अवगत कराया।
दोनों देशों के बीच हुई हालिया उच्च-स्तरीय बैठकों की भी समीक्षा की गई, जिसमें केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और यूएई के विदेश व्यापार मंत्री के बीच हुई वार्ताएं शामिल हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य 2030 तक गैर-तेल और गैर-कीमती धातु व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को दोहराना था।
बैठक का समापन व्यापार को और सुगम बनाने, नियामक सहयोग को मजबूत करने, डेटा साझाकरण को बढ़ावा देने और सेवा उप-समिति की बैठक आयोजित करने पर सहमति के साथ हुआ। यूएई प्रतिनिधिमंडल ने भारत के वाणिज्य सचिव के साथ भी मुलाकात की, जहां सीईपीए के प्रभावी उपयोग से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। यूएई प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा भारत-यूएई के बीच व्यापारिक संतुलन को मजबूत करने, बाजार के अवसरों का विस्तार करने और सीईपीए के तहत रणनीतिक साझेदारी को और गहरा बनाने की दिशा में दोनों देशों की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
