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भारत-रूस की प्रगाढ़ दोस्ती के लिए बाबा विश्वनाथ और मां गंगा से प्रार्थना

By Dec 5, 2025

वाराणसी में भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक और प्रगाढ़ दोस्ती के प्रतीक के रूप में एक अनूठा आयोजन किया गया। नमामि गंगे संगठन ने श्री काशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार पर मां गंगा की विशेष आरती उतारी। यह आयोजन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली शिखर वार्ता के अवसर पर संपन्न हुआ।

इस विशेष आरती के दौरान, भारत-रूस के बीच बहुआयामी और द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए श्री काशी विश्वनाथ से प्रार्थना की गई। नमामि गंगे टीम के सदस्यों ने भारत-रूस के राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की तस्वीरें लेकर बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का आशीर्वाद मांगा।

आयोजन के बाद, नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक और नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा प्रदान करेगी। सूत्रों के अनुसार, शिखर वार्ता के दौरान दोनों नेता कट्टरवाद, उग्रवाद, सीमा पार आतंकवाद और वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क को समाप्त करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराएंगे। इसके साथ ही, वे वैश्विक साझेदारी को और समृद्ध बनाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे।

राजेश शुक्ला ने आगे बताया कि दोनों देशों के नेता द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने, सुरक्षा सहयोग बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी को प्रोत्साहित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भी उद्योग संबंधों के माध्यम से नए रास्ते तलाशने की दिशा में चर्चा की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “हमने मां गंगा से यही आशीर्वाद मांगा है कि भारत और रूस की द्विपक्षीय वार्ता हर मुद्दे पर प्रगाढ़ और मजबूत बनी रहे।”

इस महत्वपूर्ण आयोजन में नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला के अलावा डॉक्टर कमलेश कुमार, संतोष शर्मा, नितेश कुमार, चंद्रशेखर शर्मा, विश्वजीत त्रिपाठी, शांभवी मिश्रा सहित सैकड़ों नागरिक शामिल हुए।

यह आयोजन भारत और रूस के बीच मित्रता को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। दोनों देशों के नेताओं की यह मुलाकात न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर प्रदान करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देगी। वाराणसी में आयोजित यह धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भारत-रूस संबंधों की मजबूती का एक जीवंत प्रतीक बन गया है।

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