भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट विनिर्माण को बढ़ावा, कैबिनेट ने ₹7280 करोड़ की योजना को दी मंजूरी
नई दिल्ली: भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक (REPM) विनिर्माण योजना को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, अगले सात वर्षों में दुर्लभ मृदा की खोज और उत्पादन पर ₹7,280 करोड़ की भारी राशि खर्च की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत में 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की एकीकृत दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक विनिर्माण क्षमता स्थापित करना है।
भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस योजना से भारत की आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी और उच्च-तकनीकी अनुप्रयोगों में देश की क्षमताओं में वृद्धि होगी। यह कदम भारत को वैश्विक REPM बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक (REPM) आज के सबसे शक्तिशाली स्थायी चुंबकों में से एक हैं। ये इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे पवन टर्बाइन), इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यह योजना एक एकीकृत विनिर्माण सुविधा स्थापित करने में मदद करेगी, जिसमें दुर्लभ मृदा ऑक्साइड को धातु में, धातु को मिश्र धातु (alloy) में और अंततः मिश्र धातु को तैयार REPM में बदलने की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी।
यह योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में भारत कई महत्वपूर्ण दुर्लभ मृदा खनिजों और उनसे बने उत्पादों के लिए चीन जैसे देशों पर अत्यधिक निर्भर है। इस पहल के माध्यम से, भारत न केवल अपनी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में भी उभरेगा। इस निवेश से अनुसंधान और विकास को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत भविष्य की प्रौद्योगिकियों में अग्रणी बन सके।
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