भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति: मोबाइल आयात लगभग शून्य, निर्यात में 127 गुना वृद्धि
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में मोबाइल फोन का आयात घटकर मात्र 0.02 प्रतिशत रह गया है, जो एक दशक पहले की तुलना में एक क्रांतिकारी बदलाव है। दस साल पहले, भारत अपनी जरूरत का लगभग 75 प्रतिशत मोबाइल फोन आयात करता था।
मंत्रालय के अनुसार, सरकार के सुनियोजित प्रयासों के चलते इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के उत्पादन में पिछले दस वर्षों में छह गुना की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में, इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स का कुल उत्पादन 11.3 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह आंकड़ा मात्र 1.9 लाख करोड़ रुपये था।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि देश को इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत मिशन’ के तहत प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाओं की घोषणा की और एक मजबूत इको-सिस्टम तैयार करने पर जोर दिया। इसी का परिणाम है कि आज भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। अब देश में मोबाइल फोन के विभिन्न पुर्जों का निर्माण भी स्थानीय स्तर पर हो रहा है।
संसद को दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में मोबाइल फोन का निर्यात 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह आंकड़ा मात्र 0.01 लाख करोड़ रुपये था। इस प्रकार, मोबाइल फोन के निर्यात में इस अवधि के दौरान लगभग 127 गुना की जबरदस्त वृद्धि हुई है।
सरकार ने आईटी हार्डवेयर क्षेत्र के लिए भी PLI योजना शुरू की है, जिसके तहत अब देश में लैपटॉप और टैबलेट जैसे उपकरणों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। वर्तमान में, भारत सालाना एक करोड़ से अधिक लैपटॉप का आयात करता है, और इस क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
