भारत बनाएगा 150 किग्रा का स्वदेशी सुसाइड ड्रोन, 900 किमी दूर तक करेगा हमला
भविष्य की युद्ध रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए, भारत 150 किलोग्राम श्रेणी का अपना स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन (सुसाइड ड्रोन) विकसित करने की तैयारी में है। यह अत्याधुनिक ड्रोन दुश्मन के ठिकानों पर अत्यंत सटीकता से हमला करने में सक्षम होगा, जिसकी रेंज 900 किलोमीटर तक होगी। इस परियोजना से रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी।nnइस महत्वपूर्ण पहल के तहत, सोलर डिफेंस एंड एरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) ने बेंगलुरु स्थित सीएसआइआर-नेशनल एरोनाटिकल लेबोरेटरीज (सीएसआइआर-एनएएल) के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किए हैं। यह करार 150 किलोग्राम वर्ग के लोइटरिंग म्यूनिशन यूएवी (एलएम-यूएवी) के डिजाइन और निर्माण से संबंधित है। यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।nnकेंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस परियोजना में उद्योग भागीदार को शुरू से शामिल करने की सीएसआइआर की अनूठी पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक महत्व की परियोजनाओं में नवाचार और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।nnएसडीएएल के अनुसार, यह करार तकनीकी रूप से सर्वश्रेष्ठ और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को प्रदान करने की उनकी प्रतिबद्धता में एक मील का पत्थर है। एलएम-यूएवी कंपनी के दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें उन्नत क्षमताओं को स्वदेशी सामग्री के साथ मिलाकर भविष्य की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा किया जाएगा।nnएसडीएएल का चयन सीएसआइआर द्वारा एक प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया गया था, जिसमें पांच कंपनियों ने भाग लिया था। लोइटरिंग म्यूनिशन यूएवी, जिसे कामिकेज ड्रोन या सुसाइड ड्रोन भी कहा जाता है, एक मानव रहित हवाई वाहन है जिसमें ड्रोन और मिसाइल दोनों की विशेषताएं होती हैं। यह लक्ष्य पर हमला करने के बाद स्वयं नष्ट हो जाता है। यह दुश्मन के क्षेत्र में मंडरा कर लक्ष्य की पहचान कर सकता है और आवश्यकता पड़ने पर स्मार्ट गाइडेड मिसाइल के रूप में कार्य कर सकता है। इसमें विस्फोटक भरकर इसे एक प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।nnइस ड्रोन में सीएसआइआर-एनएएल द्वारा विकसित वैंकल इंजन का उपयोग किया जाएगा, जिसे एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग के लिए प्रमाणन प्राप्त हो चुका है। इसमें उन्नत पेलोड और उच्च स्तर की स्वदेशी सामग्री का समावेश होगा। यह ड्रोन छह से नौ घंटे तक पांच किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम होगा और 900 किलोमीटर की रेंज प्रदान करेगा।nnइसकी स्टेल्थ क्षमता भी उन्नत होगी, जिसमें बेहद कम रडार क्रॉस सेक्शन (आरसीएस) होगा, जिससे रडार से इसका पता लगाना अत्यंत कठिन होगा। यह जीपीएस की सहायता के बिना भी प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मिशन की विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।”
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ता सुनिश्चित होगी।”
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