भाखड़ा बांध पर बढ़ा दबाव, झुकाव की सीमा पार; मरम्मत परियोजना रुकी
देश के महत्वपूर्ण जल संसाधनों में से एक भाखड़ा बांध इन दिनों सरकार और आमजन के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। बांध पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते इसका झुकाव (विक्षेप) निर्धारित सुरक्षित सीमा को पार कर रहा है। इस वर्ष बांध का झुकाव 1.1408 इंच तक दर्ज किया गया, जो कि गैर-भूकंपीय परिस्थितियों में 1.03 इंच की तय सीमा से अधिक है। हालांकि यह 2019 में दर्ज 1.1476 इंच के आंकड़े से थोड़ा कम है, लेकिन लगातार सीमा पार करना तकनीकी विशेषज्ञों और प्रबंधन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
बांध की बनावट के अनुसार, जब भी इस पर पानी का दबाव बढ़ता है, तो इसके झुकाव में वृद्धि देखी जाती है। इस बार भी स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने बांध के जलस्तर को कम करने का निर्णय लिया है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, क्योंकि पानी का स्तर घटने पर बांध अपनी मूल स्थिति में लौट आता है। हालांकि, बार-बार ऐसी स्थिति का उत्पन्न होना भविष्य के लिए संकेत दे रहा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि भविष्य में बीबीएमबी बांध का जलस्तर 1,680 फीट से नीचे रखने पर विचार कर सकता है, ताकि संरचना पर पड़ने वाले तनाव को कम किया जा सके।
वर्ष 1964 में बांध के लिए तैयार की गई मूल डिजाइन गणनाओं में गैर-भूकंपीय परिस्थितियों में अधिकतम 1.03 इंच और भूकंपीय परिस्थितियों में 1.53 इंच के झुकाव को स्वीकार्य माना गया था। इसके बावजूद, वर्षों से लगाए गए निगरानी उपकरणों के आंकड़े कई मौकों पर इस सीमा को पार करते हुए देखे गए हैं। बीबीएमबी इसे जलस्तर में अचानक वृद्धि से उत्पन्न स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रहा है। परंतु, बार-बार निर्धारित सीमा से अधिक झुकाव का दर्ज होना यह दर्शाता है कि निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाने तथा संभावित जोखिमों का आकलन करने की तत्काल आवश्यकता है।
चिंताजनक बात यह है कि बांध की सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई पुनर्वास एवं सुधार परियोजना भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाई है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा वर्ष 2012 में बांधों के आधुनिकीकरण और बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से इस योजना को प्रारंभ किया गया था। परन्तु, बीबीएमबी के भागीदार राज्यों द्वारा मरम्मत कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना अभी भी अधर में लटकी हुई है। इस देरी के कारण समय पर आवश्यक सुधार कार्य नहीं हो पा रहे हैं, जिससे बांध की सुरक्षा को लेकर जोखिम बढ़ रहा है।
