बरसाना में श्रीकृष्ण की महिमा राधारानी से ही : रमेश भाई ओझा
बरसाना और भगवान श्रीकृष्ण के बीच राधारानी के कारण एक अत्यंत पावन संबंध स्थापित है, यही कारण है कि इस भूमि पर श्रीकृष्ण को राधावर के रूप में पूजा जाता है। यहाँ श्रीकृष्ण की महिमा का आधार स्वयं राधारानी हैं। यह उद्गार प्रख्यात भागवताचार्य रमेश भाई ओझा ने माताजी गोशाला में आयोजित अष्टदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन व्यक्त किए।
शुक्रवार को कथा के दौरान उन्होंने रासलीला के दिव्य और गूढ़ रहस्य को समझाते हुए कहा कि जो साधक अपनी आत्मा में रति रखते हैं, उनके लिए कोई भी कर्तव्य शेष नहीं रह जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि राधारानी भगवान श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति हैं। वे श्रीकृष्ण से कोई अलग तत्व नहीं, बल्कि उनकी स्वयं आत्मा हैं। ज्ञान की दृष्टि से जो ‘आत्माराम’ हैं, वही भक्ति की दृष्टि से ‘राधारमण’ कहलाते हैं।
रमेश भाई ओझा ने आगे कहा कि वृषभानुजी, जो राधारानी के पिता थे, धर्म के चारों चरणों – सत्य, तप, पवित्रता एवं दया के धनी थे। उनके इन सद्गुणों के कारण ही राधारानी जैसी दिव्य शक्ति उनके घर पुत्री रूप में प्रकट हुईं।
इसी कथा के अवसर पर, शाम को आयोजित नवदिवसीय सीताराम विवाहोत्सव में भी भक्तों ने एक अद्भुत दृश्य का अनुभव किया। बक्सर के नारायण भक्तमाली, मामाजी की बेटी सिया दीदी और उनके सहयोगियों ने सीता जन्म लीला का अत्यंत मनोहारी और भावविभोर कर देने वाला मंचन प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति को उपस्थित भक्तों ने बड़े ही श्रद्धा और आनंद के साथ देखा।
इस धार्मिक आयोजन में कई गणमान्य संत और भक्तजन उपस्थित रहे, जिनमें गीता मनीषी संत ज्ञानानंद महाराज, भागवत प्रवक्ता कृष्णचंद्र ठाकुर, संत दीनबंधु दास, पूरन कौशिक, कन्हैयालाल अग्रवाल, उमाकांत, नृसिंह बाबा, रामजीलाल शास्त्री, राधाकांत शास्त्री, सुनील सिंह ब्रजदास, ब्रजशरण दास बाबा, पद्मेश गुप्ता, अनुराधा गुप्ता सहित अन्य कई प्रमुख व्यक्ति शामिल थे।
