बैंक खाता फ्रीज: पुलिस के कहने पर नहीं, हाईकोर्ट ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यह स्पष्ट किया है कि पुलिस के केवल अनुरोध पर बैंक किसी भी व्यक्ति या संस्था के खाते को फ्रीज नहीं कर सकते। यदि कोई बैंक बिना विधिक प्रक्रिया का पालन किए ऐसा करता है, तो उसे हुई वित्तीय हानि और प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान के लिए सिविल और आपराधिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। इस निर्णय के साथ, न्यायालय ने पुलिस और बैंकों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
यह फैसला खालसा मेडिकल स्टोर के प्रोपराइटर यशवंत सिंह की याचिका पर सुनाया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि एक्सिस बैंक में उनका खाता हैदराबाद पुलिस के एक नोटिस के बाद फ्रीज कर दिया गया था। पुलिस का कहना था कि साइबर फ्रॉड से जुड़े एक मामले में पीड़ित के पैसे इस खाते में ट्रांसफर हुए थे। बैंक ने स्वीकार किया कि उन्हें नोटिस मिला था, लेकिन कोई औपचारिक जब्ती आदेश या फ्रीज की जाने वाली राशि का उल्लेख नहीं था।
न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि नोटिस में किसी राशि का उल्लेख नहीं था और बैंक के बार-बार अनुरोध के बावजूद पुलिस ने एफआईआर की कॉपी या कोई विधिवत जब्ती आदेश प्रदान नहीं किया। ऐसी स्थिति में खाते को फ्रीज रखना उचित नहीं है।
खाता फ्रीज करने के संबंध में दिशा-निर्देश
न्यायालय ने कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे अपराध की आय को हटाए जाने से रोकने के लिए, सीमित अवधि के लिए खाते को फ्रीज करने की आवश्यकता को स्वीकार किया। हालांकि, ऐसे मामलों में भी जांच अधिकारी का यह दायित्व है कि वे तीन से चार दिनों के भीतर जब्ती आदेश, वाद संख्या और फ्रीज की जाने वाली राशि का विवरण बैंक को उपलब्ध कराएं।
मुख्य दिशा-निर्देशों में शामिल हैं:
बीएनएसएस की धारा 106 को पुलिस को केवल संदेह के आधार पर संपत्ति जब्त करने का अधिकार नहीं देना चाहिए। कार्रवाई ठोस और उचित आधार पर आधारित होनी चाहिए।
खाता फ्रीज करने की सूचना तत्काल बैंक या भुगतान सेवा प्रणाली के नोडल अधिकारी को भेजी जानी चाहिए, साथ ही एफआईआर या सूचना की प्रति संलग्न होनी चाहिए। बिना इसके अनुरोध अस्वीकार किया जा सकता है।
पुलिस पूरे खाते को अवरुद्ध करने का अनुरोध नहीं कर सकती, केवल विशिष्ट राशि पर लियन (अधिकार) लगाने का निर्देश दिया जा सकता है।
खाता ब्लॉक करने की सूचना 24 घंटे के भीतर संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी भेजी जानी चाहिए, अन्यथा कार्रवाई शून्य मानी जा सकती है।
यदि बैंक निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना खाता फ्रीज करता है, तो उसे वित्तीय और प्रतिष्ठा संबंधी नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
यह निर्णय आम जनता के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि उनकी वित्तीय संपत्तियों को मनमाने ढंग से फ्रीज नहीं किया जा सकेगा और बैंकों को कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
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