बांग्लादेश चुनाव: 12.7 करोड़ मतदाता तय करेंगे देश का भविष्य, मुख्य मुकाबला जमात-ए-इस्लामी और BNP में
बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए मतदान जारी है, जिसमें लगभग 12.7 करोड़ मतदाता देश के भविष्य का फैसला करेंगे। इस बार 51 राजनीतिक दल चुनावी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के बीच होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने 299 संसदीय सीटों पर मतदान की व्यवस्था की है, जबकि एक सीट पर उम्मीदवार की मृत्यु के कारण मतदान स्थगित कर दिया गया है।
युवाओं की भूमिका इस चुनाव में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगभग आधे मतदाता 18 से 37 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। इनमें से करीब 45.7 लाख मतदाता पहली बार मतदान करेंगे। BNP, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी, सत्ता की प्रमुख दावेदार मानी जा रही है। यदि BNP जीतती है, तो यह उम्मीद की जा रही है कि खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने वोट डालने के बाद कहा कि यह दिन पूरे देश के लिए खुशी और आजादी का प्रतीक है। उन्होंने इसे एक बुरे दौर के अंत और नए सपनों की शुरुआत बताया, जो मिलकर एक नया बांग्लादेश बनाने का अवसर प्रदान करता है।
हालांकि, कुछ स्थानों पर चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल भी उठ रहे हैं। ढाका से एक निर्दलीय उम्मीदवार तसनीम जरा ने आरोप लगाया है कि उनके मतदान एजेंटों को विभिन्न बहाने बनाकर मतदान केंद्रों से बाहर निकाला जा रहा है। उन्होंने खिलगांव मॉडल कॉलेज केंद्र पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि एजेंटों को परेशान किया जा रहा है और उन्हें फोन अंदर न ले जाने के लिए कहा जा रहा है, जबकि फोन ले जाने की अनुमति है, लेकिन उनका उपयोग वर्जित है।
शेख हसीना के गढ़ माने जाने वाले गोपालगंज में मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की उपस्थिति काफी कम देखी जा रही है। जहां उम्मीदवार मौजूद हैं, वहां मतदाताओं से अधिक पार्टी कार्यकर्ता नजर आ रहे हैं। सुबह 10 बजे तक अधिकांश केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या बहुत कम थी। तुंगीपाड़ा उपजिला के कई केंद्रों पर अवामी लीग के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार के एजेंट नहीं दिखे। गोपालगंज जिले की तीन सीटों पर लगभग 10 लाख मतदाता हैं और यह लंबे समय से अवामी लीग का मजबूत गढ़ रहा है। इस बार अवामी लीग पर प्रतिबंध के कारण मतदाताओं में चुनाव को लेकर उत्साह कम दिख रहा है।
जमात-ए-इस्लामी के महासचिव मिया गुलाम पोरवार ने कहा कि संसदीय चुनावों के बाद एक बदला हुआ बांग्लादेश सामने आएगा। उन्होंने अपना वोट डालने के बाद कहा कि सैकड़ों लोग शांतिपूर्ण माहौल में मतदान कर रहे हैं। उन्होंने 2018 के चुनाव को याद करते हुए कहा कि उस समय उन्हें वोट डालने से रोका गया था, लेकिन आज बांग्लादेश बदल गया है।
सिलहट-1 में स्थित शाहजलाल जामिया इस्लामिया कामिल मदरसा और पठानतुला हाई स्कूल केंद्रों पर सुबह से ही महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं। मतदाताओं ने जल्दी मतदान करने को घर के काम समय पर निपटाने में सहायक बताया।
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने वोट डालने के बाद कहा कि आज से हमें हर स्तर पर एक नया बांग्लादेश बनाने का अवसर मिला है। उन्होंने सभी से वोट डालने और जश्न मनाने का आग्रह किया। उन्होंने इसे खुशी और आजादी का दिन बताते हुए कहा कि यह बुरे सपनों का अंत और नए सपनों की शुरुआत है।
यह चुनाव देश के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे भविष्य की नीतियां और शासन का स्वरूप तय होगा।
