श्रम सुधारों में व्यापार सुगमता और श्रमिक कल्याण का संतुलन जरूरी: अनिल राजभर – UP Labour Reforms
उत्तर प्रदेश के श्रम एवं रोजगार मंत्री अनिल राजभर ने कहा है कि समावेशी विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में श्रम सुधारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्रम सुधारों को लागू करते समय व्यापार करने में सुगमता और श्रमिक कल्याण के बीच एक प्रभावी संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। यह टिप्पणी राज्य परिवर्तन आयोग (एसटीसी) द्वारा आईआईएम लखनऊ के सहयोग से आयोजित एक श्रम सुधार कार्यशाला के दौरान की गई।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने प्रदेश में श्रम सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने के विभिन्न पहलुओं पर गहन मंथन किया। श्रम व रोजगार विभाग के प्रमुख सचिव डा. एमके सुंदरम ने श्रमिकों के कौशल विकास, उनके उन्नयन, कार्यस्थल पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, उचित सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने और वार्षिक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने गिग और प्लेटफार्म श्रमिकों को श्रम व सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में औपचारिक रूप से एकीकृत करने के महत्व को भी रेखांकित किया।
प्रमुख सचिव, योजना आलोक कुमार, अपर मुख्य सचिव अवसंरचना व औद्योगिक विकास आलोक कुमार और राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने प्रदेश के श्रम बाजार को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रगतिशील श्रम नियम बनाए जाने की कार्ययोजना पर बल दिया। कार्यशाला में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण, लघु व मध्यम उद्यम, हस्तशिल्प और रसद जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों की जमीनी चुनौतियों पर भी चर्चा की। श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए जोखिम आधारित निरीक्षण, अनुपालन का डिजिटलीकरण, अवकाश व कार्य समय नीतियों में लचीलापन और वेतन की परिभाषाओं में स्पष्टता जैसे सुझाव दिए गए। इन सुधारों का उद्देश्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।
