पश्चिमांचल के 13 जिलों में एक लाख स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का बैलेंस जीरो, बिजली बिलिंग में गड़बड़ी
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले 13 जिलों में एक लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के बिजली बिलिंग सिस्टम में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। सिस्टम में बार-बार आई तकनीकी खराबी के कारण बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का बैलेंस एकाएक शून्य हो गया, जिससे उनकी बिजली की आपूर्ति और बिलिंग प्रभावित हुई। यह मामला पावर कॉरपोरेशन की एक समीक्षा बैठक में सामने आया, जहां पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने स्वीकार किया कि उनका पूरा सिस्टम नियंत्रण से बाहर हो गया था।
स्मार्ट मीटरों के बैलेंस को लेकर उपभोक्ताओं द्वारा पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार बड़े पैमाने पर सिस्टम फेल होने की घटना पहली बार सामने आई है। निगम के अनुसार, 11 दिसंबर को साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट (एसएटी) में बार-बार आई बाधाओं के चलते बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के मीटरों में शुल्क गणना प्रणाली विफल हो गई और उनका बैलेंस शून्य显示 होने लगा।
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के तहत मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, बागपत, शामली, हापुड़, अमरोहा और संभल जैसे जिले आते हैं। निगम ने यह भी बताया कि वे डाटा के लिए पूरी तरह से एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर (एएमआईएसपी) पर निर्भर हैं, लेकिन दस महीने बीत जाने के बाद भी डाटा निकालने का कोई प्रभावी तरीका विकसित नहीं हो पाया है।
इसके अतिरिक्त, नए स्मार्ट प्रीपेड मीटर मीटर डाटा मैनेजमेंट सिस्टम (एमडीएमएस) में शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे फीडर स्तर की ऊर्जा लेखांकन और रिपोर्टिंग में भी समस्या आ रही है। शामली जैसे जिलों में ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां उपभोक्ताओं ने पैसा जमा करने के बावजूद कई दिनों तक बिजली नहीं मिली, जिसका कारण आउटडेटेड उपभोक्ता ऐप और गलत डाटा को बताया गया।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मामले की गहन जांच की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के एमडीएम सिस्टम में कई खामियां हैं जिन्हें छुपाया जा रहा था, लेकिन अब पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने इसे स्वीकार कर लिया है। उन्होंने चिंता जताई कि यह समस्या अन्य क्षेत्रों में भी उत्पन्न हो सकती है।
वर्तमान में, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में 10 लाख 82 हजार से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में अब तक 56 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें से 37 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर प्रीपेड मोड में बदले गए हैं।
स्मार्ट मीटरों में इस तरह की गड़बड़ी उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि यह न केवल उनके बिलिंग को प्रभावित करता है बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए मजबूत तकनीकी समाधान और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता है।
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