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बॉक्स ऑफिस पर ‘गुस्ताख़ इश्क़’ का संघर्ष जारी, ‘तेरे इश्क़ में’ से पिछड़ी

By Dec 3, 2025

विजय वर्मा और फातिमा सना शेख की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘गुस्ताख़ इश्क़’ बॉक्स ऑफिस पर अपनी छाप छोड़ने में नाकाम साबित हो रही है। फिल्म अपने छठे दिन यानी मंगलवार को मात्र 1 लाख रुपये का कलेक्शन कर पाई, जिससे इसका कुल नेट कलेक्शन 1.51 करोड़ रुपये तक ही पहुंच पाया है। यह आंकड़ा फिल्म के प्रतिस्पर्धी ‘तेरे इश्क़ में’ की तुलना में काफी कम है, जिसने रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी है।

‘गुस्ताख़ इश्क़’ 28 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, उसी दिन धनुष और कृति सेनन की ‘तेरे इश्क़ में’ भी प्रदर्शित हुई थी। जहाँ ‘गुस्ताख़ इश्क़’ पहले दिन से ही धीमी गति से आगे बढ़ रही है, वहीं ‘तेरे इश्क़ में’ लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है।

विभु पुरी द्वारा निर्देशित ‘गुस्ताख़ इश्क़’ ने अपने पहले सोमवार को सबसे कम कमाई की थी, लेकिन मंगलवार को थोड़ी बढ़त देखी गई। सूत्रों के अनुसार, फिल्म ने छठे दिन केवल 1 लाख रुपये कमाए। 1990 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म ने 50 लाख रुपये के साथ अपना खाता खोला था, जो शनिवार को घटकर 45 लाख और रविवार को 35 लाख रुपये हो गया। इन आंकड़ों के साथ, भारतीय बाजार में ‘गुस्ताख़ इश्क़’ का कुल नेट कलेक्शन 1.50 करोड़ रुपये हो गया है।

जहां तक सकल कलेक्शन की बात है, तो फिल्म ने छठे दिन 1 लाख रुपये कमाए, जिससे घरेलू बाजार में कुल कमाई 1.65 करोड़ रुपये हो गई। यह 28 नवंबर 2025 को रिलीज होने के बाद से फिल्म की सबसे कम दैनिक कमाई है। फिल्म ने शुक्रवार को 50 लाख, शनिवार को 45 लाख और रविवार को 35 लाख रुपये का कलेक्शन किया था। कुल मिलाकर, ‘गुस्ताख़ इश्क़’ का कुल कलेक्शन 1.37 करोड़ रुपये नेट है। सोमवार को 2,401 शो में 5.8% की ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई थी, जो मंगलवार को 426 शो में बढ़कर 10.8% हो गई। यह मामूली वृद्धि माउथ पब्लिसिटी और शो की संख्या में वृद्धि का परिणाम हो सकती है।

‘तेरे इश्क़ में’ के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद, ‘गुस्ताख़ इश्क़’ पीछे छूट गई है। आनंद एल राय की ‘तेरे इश्क़ में’ ने भी सोमवार को कमाई में गिरावट देखी, लेकिन फिर भी ‘गुस्ताख़ इश्क़’ से बेहतर प्रदर्शन किया। यह फिल्म घरेलू बाजार में 70 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है।

डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ​​की निर्माता के तौर पर यह पहली फिल्म सॉफ्ट बताई जा रही है, जिसमें और अधिक भावनात्मक गहराई की आवश्यकता थी। संगीत, कविता और प्रदर्शनों में सुंदरता के कुछ अंश जरूर हैं, लेकिन कहानी कमजोर पड़ती नजर आती है। यह फिल्म जोरदार तालियों की बजाय सूक्ष्म प्रशंसा बटोर पाई है। दर्शक कुछ खास यादों के साथ बाहर निकलते हैं, न कि पूरे अनुभव के साथ। शायद यही कुछ हद तक असंतोषजनक अनुभव ‘गुस्ताख़ इश्क़’ की पहचान बन गया है।

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