बिना बैटरी के चलेगा रिमोट, टावर तरंगों से मिलेगी ऊर्जा
भविष्य में मोबाइल टावर सिर्फ नेटवर्क का माध्यम नहीं रहेंगे, बल्कि ऊर्जा के स्रोत के रूप में भी काम करेंगे। ट्रिपल आईटी (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) भागलपुर के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व तकनीक विकसित की है, जो 5जी सेल टावरों से उत्सर्जित होने वाली रेडियो तरंगों से ऊर्जा प्राप्त कर सकती है। इस ऊर्जा का उपयोग छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सेंसर को संचालित करने के लिए किया जा सकेगा।nnयह क्रांतिकारी शोध भारत को एनर्जी इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के एक नए युग में प्रवेश करा सकता है, जहाँ उपकरण पर्यावरण से ऊर्जा प्राप्त कर निरंतर कार्य कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नवाचार भारत की 5जी क्रांति को और गति देगा और स्मार्ट शहरों के लिए स्वदेशी ऊर्जा समाधान प्रदान करेगा, जिससे देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा।nnइस परियोजना का नेतृत्व डॉ. प्रकाश रंजन कर रहे हैं, जबकि डॉ. चेतन बार्डे सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में योगदान दे रहे हैं। यह महत्वपूर्ण शोध आई हब दिव्य संपर्क आईआईटी रुड़की के सहयोग से आगे बढ़ रहा है। परियोजना का आधिकारिक शीर्षक ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी हार्वेस्टिंग सिस्टम फॉर वायरलेस सेंसर नोड एंड आइओटी एप्लिकेशंस’ है।nnडॉ. रंजन के अनुसार, भारत में 5जी नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है। इस विस्तार के साथ, 5जी टावरों से निरंतर उत्सर्जित होने वाली मिलीमीटर वेव सिग्नल, विशेष रूप से एन257 (26.5-29.5 जीएचजेड) और एन258 (24.25-27.5 जीएचजेड बैंड) को इस नई तकनीक की सहायता से उपयोगी डीसी ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकेगा। यह ऊर्जा निकटवर्ती सेंसर, निगरानी यंत्रों या IoT उपकरणों को बिजली प्रदान करेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब चुनौती केवल ऊर्जा संग्रहित करना ही नहीं, बल्कि उसे स्थिर और बुद्धिमानी से उपयोग करना भी है।nnइस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, शोधकर्ताओं ने विशेष एमएमवेव रेक्टेना, इम्पीडेंस मैचिंग नेटवर्क और पावर मैनेजमेंट सर्किट विकसित किए हैं। ये घटक 5जी तरंगों को प्रभावी ढंग से उपयोगी डीसी पावर में बदलते हैं। यह तकनीक उन दूरदराज के इलाकों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगी जहाँ बिजली या चार्जिंग की सुविधाएँ सीमित हैं। इससे मोबाइल टावरों की संरचनात्मक स्थिति की निगरानी करने वाले उपकरण, सुरक्षा सेंसर और पर्यावरण निगरानी सेंसर को स्वयं-संचालित बनाया जा सकेगा, जिससे बाहरी ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम हो जाएगी।nnसह-प्रधान अन्वेषक डॉ. चेतन बार्डे ने बताया कि यह शोध विशेष रूप से भारतीय 5जी स्पेक्ट्रम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें मेटासर्फेस आधारित डिजाइन और शॉटकी डायोड युक्त सर्किट का उपयोग किया गया है, जो उच्च आवृत्ति बैंड पर भी उत्कृष्ट स्थिरता बनाए रखने में सक्षम हैं।”
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