बच्चों को टीबी से बचाएगी टॉफी वाली दवा, बिहार में मुफ्त वितरण शुरू
बिहार में बच्चों को क्षय रोग (टीबी) के संक्रमण से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण और अभिनव पहल शुरू की है। अब सरकारी अस्पतालों में बच्चों को टॉफी जैसी स्वादिष्ट और आसानी से चूसने वाली दवा मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी। यह कदम खास तौर पर टीबी से पीड़ित मरीजों के संपर्क में आने वाले बच्चों के लिए उठाया गया है, ताकि वे इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रह सकें।
स्वास्थ्य विभाग ने इस नई दवा के उपयोग को औपचारिक मंजूरी दे दी है और पटना सहित पूरे राज्य के सरकारी अस्पतालों में इसका निशुल्क वितरण जल्द ही शुरू किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस दवा का नाम आइसनियाजिड 100 एमजी है और यह प्रिवेंशन ऑफ टीबी पेशेंट (पीटीपी) प्रोग्राम के तहत वितरित की जाएगी। वर्तमान में यह टैबलेट के रूप में उपलब्ध है, लेकिन छोटे बच्चों द्वारा आसानी से सेवन सुनिश्चित करने के लिए इसे चूसने योग्य, टॉफी जैसे फ्लेवर वाले संस्करण में पेश किया जा रहा है। इस नई दवा में कड़वापन नहीं होगा, जिससे बच्चे इसे खुशी-खुशी ले सकेंगे।
जिला क्षय रोग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दवा वितरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अस्पतालों को शीघ्र ही इसकी आपूर्ति कर दी जाएगी। अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि एक अनुपचारित टीबी मरीज लगभग 15 लोगों को संक्रमित कर सकता है, इसलिए समय पर पहचान और उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण है। टीबी के लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराने और दवा को बीच में कभी न छोड़ने की सलाह दी गई है, अन्यथा बीमारी जटिल हो सकती है और ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है, जिसका उपचार लंबा, कठिन और महंगा होता है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जिन घरों में कोई सदस्य टीबी से पीड़ित होता है, वहां बच्चों में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। प्रतिरोधक दवाएं देकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नई चूसने वाली दवा छोटे बच्चों के लिए एक आसान और प्रभावी विकल्प साबित होगी, जो टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी। जिले से लेकर प्रखंड और गांव स्तर तक नियमित जांच अभियान चलाए जाएंगे, विशेष रूप से टीबी मरीजों के नियमित संपर्क में रहने वाले लोगों की जांच पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
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