0

बांकेबिहारी मंदिर में चढ़ावे को लेकर कमेटी और गोस्वामी भिड़े, आदेश दरकिनार

By Nov 22, 2025

वृंदावन स्थित ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज मंदिर में चढ़ावे को लेकर हाई पावर्ड टेम्पल मैनेजमेंट कमेटी और सेवायत गोस्वामियों के बीच चल रहा गतिरोध समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में चढ़ावे के लिए सेवायतों द्वारा रखे जाने वाले कलशों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था। इस निर्णय का उद्देश्य मंदिर में व्यवस्था बनाए रखना और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करना था।

इसके बावजूद, शुक्रवार को इस आदेश का कोई असर दिखाई नहीं दिया। जगमोहन में सेवायत गोस्वामी कलश लेकर बैठे नजर आए, जिसमें श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे को जमा किया गया और बाद में गोस्वामी अपने घरों को ले गए। यह स्थिति तब है जब मंदिर के जगमोहन के बाहर दान पात्र भी रखे गए हैं। कमेटी और गोस्वामियों के बीच इस मुद्दे पर सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जो इस बात का संकेत है कि मतभेद गहरे हैं।

चढ़ावे के कलशों पर रोक के फैसले पर कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी और शैलेन्द्र गोस्वामी के बीच कहासुनी और अभद्र भाषा का प्रयोग भी हुआ। यह घटना मंदिर प्रशासन के भीतर के तनाव को उजागर करती है।

यह विवाद केवल चढ़ावे तक ही सीमित नहीं है। दीपदान को लेकर भी दोनों पक्षों में असहमति देखी गई। कमेटी ने मंदिर के बाहर एक अर्द्धनिर्मित हॉल में सात दीपक जलाने की अनुमति दी थी, लेकिन सेवायत गोस्वामियों ने अपनी परंपरा के अनुसार जगमोहन में ही दीपक जलाए।

कमेटी ने भीड़ प्रबंधन में गोस्वामियों और सेवादारों के असहयोग पर भी नाराजगी जताई है। इसके चलते जगमोहन से चंदन कोठरी में जाने वाले रास्ते को बंद करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, जगमोहन के बगल के कमरे में होने वाली देहरी पूजन की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी गई है।

निरीक्षण के दौरान, कमेटी सदस्यों ने तोषखाने के पुराने और जंग लगे दरवाजे के बाहर एक अतिरिक्त मजबूत स्टील का दरवाजा लगाने के निर्देश दिए। एक अन्य मामले में, गेट संख्या पांच के पास स्थित श्री गणेश मंदिर पर लगे तालों को लेकर भी कमेटी ने कार्रवाई की। कमेटी सदस्य जस्टिस मुकेश मिश्रा ने स्थलीय निरीक्षण कर पाया कि प्रबंधक ने एक नामित सदस्य के मौखिक निर्देश पर ताले लगवाए थे, जिससे सेवा पूजा में बाधा आ रही थी। जस्टिस मिश्रा ने तत्काल तालों को खोलने और दान पात्रों को व्यवस्थित रूप से स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा पूजा के लिए मंदिर पर एक से अधिक सेवादार उपस्थित नहीं रहेंगे और दान पात्र पर स्पष्ट रूप से ‘दान पात्र’ लिखा होगा।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें