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बांका में अमरपुर बाइपास निर्माण तेज, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में

By Dec 6, 2025

बांका जिले के अमरपुर में दशकों से जाम की भीषण समस्या से जूझ रहे नागरिकों के लिए राहत की खबर है। करीब सात किलोमीटर लंबे और 74 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अमरपुर बाइपास निर्माण परियोजना ने अब अंतिम चरण की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आने से भूमि अधिग्रहण का कार्य भी गति पकड़ चुका है।

यह बाइपास कुल्हड़िया चौक (राज्य पथ–25) से शुरू होकर चपरी मोड़, दिग्घी पोखर होते हुए सिहुड़ी मोड़ (राज्य पथ–25) तक बनाया जाएगा। जिन स्थानों पर सरकारी भूमि उपलब्ध थी, वहां मिट्टी भराई और कालीकरण का प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि, रैयती भूमि के अधिग्रहण में आ रही बाधाओं के कारण कार्य लंबित था, लेकिन अब इस दिशा में भी स्पष्ट प्रगति देखी जा रही है।

प्रशासन द्वारा बैजूडीह एवं सिहुड़ी मौजा की रैयती जमीन के अधिग्रहण के लिए प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, बैजूडीह मौजा में कुल 85 खेसरा चिन्हित किए गए हैं, जिसमें आठ एकड़ से अधिक भूमि शामिल है। इन खेसरा में छह सरकारी और 48 रैयती जमीन के हैं। इसी तरह, सिहुड़ी मौजा में 31 खेसरा अधिग्रहण के लिए चयनित किए गए हैं, जिनमें 12 सरकारी और 19 रैयती खेसरा शामिल हैं। भू-अर्जन कार्यालय द्वारा दोनों मौजा के कुल 67 रैयतों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। रैयतों के नाम, खाता, खेसरा संख्या और अधिग्रहित की जाने वाली भूमि का विस्तृत विवरण प्रारंभिक सूचना के रूप में प्रकाशित किया गया है।

राज्य एसआईएस संस्थान द्वारा अमरपुर बाइपास निर्माण को लेकर किए गए सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन में यह पाया गया है कि इस परियोजना से स्थानीय लोगों की जीवनशैली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यातायात में सुगमता, जाम से मुक्ति, कृषि उत्पादन में वृद्धि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच, तथा आपातकालीन सेवाओं में सुधार जैसे कई लाभों की उम्मीद है।

ज्ञात हो कि लगभग एक दशक पूर्व तत्कालीन विधायक जनार्दन मांझी ने अमरपुर में बढ़ते जाम को देखते हुए बाइपास प्रस्ताव को राज्य स्तर पर पुरजोर तरीके से उठाया था। इसके बाद, वर्तमान विधायक एवं पूर्व भवन निर्माण मंत्री जयंत राज कुशवाहा ने तीन वर्ष पूर्व इस परियोजना की आधारशिला रखकर इसे नई गति प्रदान की। आज यह परियोजना मूर्त रूप लेती हुई दिखाई दे रही है, जिससे स्थानीय निवासियों में खुशी की लहर है।

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