बाहरी दिल्ली में धूल का कहर: सड़कों की सफाई न होने से राहगीर परेशान
बाहरी दिल्ली की सड़कें इन दिनों धूल के गुबार से पटी पड़ी हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और राहगीरों का जीवन दूभर हो गया है। कंझावला और रोहतक रोड जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर धूल की मोटी परत जमी हुई है, जो न केवल वायु प्रदूषण को बढ़ा रही है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है। बच्चों को स्कूल जाते समय भी इस धूल का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।
मुख्य कंझावला रोड पर बेगमपुर लालबत्ती से कराला चौक तक सड़क की हालत चिंताजनक है। सड़क किनारे पड़े मिट्टी और रेत के ढेर वाहनों के गुजरने से उड़कर चारों ओर फैल जाते हैं। डिवाइडर और पेड़-पौधों पर जमी धूल की परतें इस बात का प्रमाण हैं कि सड़कों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। इसके कारण सड़क किनारे स्थित दुकानों के मालिकों और ग्राहकों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
यह समस्या केवल कंझावला रोड तक ही सीमित नहीं है। रोहतक रोड पर भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। राजधानी पार्क मेट्रो स्टेशन से टीकरी बार्डर तक सड़क पर हर समय धूल उड़ती रहती है। इसी तरह, जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन से मुकरबा चौक तक भी धूल-मिट्टी ने राहगीरों को परेशान कर रखा है। भलस्वा लैंडफिल साइट के पास नाले के किनारे सड़क पर मिट्टी का अंबार लगा हुआ है, जिससे धूल उड़ने से रोकने के लिए स्माग गन से पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
सुल्तानपुरी टर्मिनल से रोहिणी सेक्टर-22 तक जाने वाली सड़क की स्थिति भी दयनीय है। इस सड़क से होकर सैकड़ों बच्चे प्रतिदिन तीन स्कूलों तक धूल फांकते हुए पहुंचते हैं। डीडीए की इस सड़क पर न तो पानी का छिड़काव होता है और न ही नियमित सफाई। जर्जर सड़क की वजह से सफाईकर्मी भी ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं।
दिल्ली में लगातार बढ़ता प्रदूषण एक गंभीर चिंता का विषय है। शनिवार को बाहरी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इसके बावजूद, सड़कों पर नियमित सफाई का अभाव धूल प्रदूषण को और बढ़ा रहा है। दिल्ली सरकार द्वारा ग्रेप-3 के नियम लागू किए जाने के बावजूद, जमीनी हकीकत में लोगों को कोई राहत नहीं मिल पा रही है।
स्थानीय निवासी शुभम ने कंझावला रोड की स्थिति बताते हुए कहा, “मैं प्रतिदिन वहां से गुजरता हूं। इतनी मिट्टी उड़ती है कि सांस लेना भी दुश्वार हो जाता है। मजबूरन मुझे मुंह ढक कर यहां से गुजरना पड़ता है। यदि यहां नियमित सफाई हो, तो शायद यह स्थिति न हो।”
एक अन्य राहगीर, नरेंद्र ने रोहतक रोड की समस्या बताते हुए कहा, “रोहतक रोड पर टीकरी बार्डर के आसपास इतनी धूल उड़ती है कि वहां से निकलना मुश्किल हो जाता है। एक तरफ दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है और दूसरी ओर यह सड़कों पर पड़ी सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई है।”
जहरीली धुंध की चादर में लिपटे दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता लगातार गंभीर बनी हुई है, जहां एक्यूआई 435 के पार पहुंच गया है। ऐसे में, सड़कों की सफाई और धूल नियंत्रण के उपायों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि आम नागरिकों को इस मुसीबत से निजात मिल सके।
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