दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद रखने पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप | delhi news
दिल्ली में एक प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा पाबंदियों के तहत मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद कई मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखने पर अदालत की अवमानना की याचिका दायर की गई है। इस कानूनी कदम से प्रशासन और यात्रियों की आवाजाही के अधिकारों के बीच एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, जिससे रोजाना सफर करने वाले आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
क्या था पूरा मामला और अदालत का निर्देश
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक राजनीतिक संगठन द्वारा जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने की योजना थी, जिसे बाद में घटाकर 45 किया गया। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सुरक्षा के नाम पर मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया था कि आम जनता, छात्रों और कामकाजी लोगों को असुविधा से बचाने के लिए मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद करने के बजाय नियंत्रित रूप से चलाया जाए।
याचिकाकर्ता के आरोप और आगे की स्थिति
शीर्ष अदालत के निर्देशों की अनदेखी का हवाला देते हुए वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदेश के बावजूद कई स्टेशनों के गेट बंद रखे गए, जिसका वीडियो प्रमाण भी पेश किए जाने की बात कही गई है। इस मामले में अब अदालत के आगामी रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं कि सुरक्षा और नागरिकों की स्वतंत्रता के संतुलन पर वह क्या फैसला लेती है।
