Aligarh News: अंधविश्वास के कारण मिर्गी के इलाज में देरी, झाड़-फूंक से बिगड़ रही मरीजों की हालत
अलीगढ़ में मिर्गी जैसी गंभीर बीमारी का इलाज आज भी अंधविश्वास और भ्रांतियों के कारण सही समय पर नहीं हो पाता है। बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन चिकित्सा उपचार के बजाय दरगाहों, मंदिरों या झाड़-फूंक करने वाले ओझाओं के चक्कर लगाते रहते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस वजह से बीमारी नियंत्रित होने के बजाय और बिगड़ जाती है।
मलखान सिंह जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में हर वर्ष छह सौ से अधिक मिर्गी रोगी उपचार के लिए आते हैं। विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 10 से 12 नए या पुराने मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, अधिकतर मरीज 20 से 45 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं, जिनमें युवाओं और कामकाजी लोगों की संख्या ज्यादा है। अब भी लगभग 15 से 20 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जो इस बीमारी को दैवीय या ऊपरी प्रभाव मानकर गलत दिशा में भटक जाते हैं।
मनोचिकित्सकों का कहना है कि मिर्गी का इलाज पूरी तरह संभव है। नियमित दवा लेने से अधिकांश मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। लेकिन दवा बीच में छोड़ देने या झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाने से बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले सकती है। समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की सामाजिक व मानसिक स्थिति भी प्रभावित होती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जाता है, ताकि अंधविश्वास के बजाय वैज्ञानिक उपचार को बढ़ावा मिल सके।
