अखिलेश का यू-टर्न: ओवैसी की पार्टी से गठबंधन पर सपा सांसद बोले- ‘स्वागत है’
बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की हार से सबक लेते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है। सपा अब ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत करने के साथ-साथ छोटे दलों को जोड़ने की कोशिश में जुटी है। इसी कड़ी में, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के साथ संभावित गठबंधन को लेकर सपा की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं।
सपा ने हाल ही में अपने सांसदों की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें चुनाव रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक के बाद, सपा सांसद रमाशंकर राजभर से जब ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सीधे तौर पर ओवैसी का नाम लिए बिना कहा कि भाजपा को हराने के लिए जो भी दल साथ आना चाहते हैं, उनका स्वागत है। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले सपा अक्सर ओवैसी की पार्टी को ‘वोट कटवा’ कहकर दूरी बनाए रखती थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में वोटों के बिखराव, जिसमें ओवैसी की पार्टी ने कई सीटों पर अहम भूमिका निभाई, ने महागठबंधन को नुकसान पहुंचाया। अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में ऐसी स्थिति से बचना चाहते हैं, क्योंकि मुस्लिम वोटों के बंटवारे का सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है।
इस बयान के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। सपा छोटे दलों को मिलाकर एक ‘महागठबंधन’ बनाने की दिशा में बढ़ रही है, ताकि भाजपा के खिलाफ एकमुश्त वोट पड़े। ओवैसी की पार्टी को साथ जोड़कर मुस्लिम बहुल सीटों पर जीत पक्की करने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है। इसके जरिए पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को एक मंच पर लाने की कोशिश हो सकती है।
हालांकि, सपा की ओर से सकारात्मक संकेत मिलने के बाद अब गेंद ओवैसी के पाले में है। एआईएमआईएम लंबे समय से उत्तर प्रदेश में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। रमाशंकर राजभर के बयान से यह स्पष्ट है कि गठबंधन के दरवाजे अब पूरी तरह बंद नहीं हैं।
