आगरा जल त्रासदी: दूषित पानी ने छीना बेटा, मां ने फेंका मुआवजा
33 साल पहले, 20 मई 1993 को आगरा के खटीकपाड़ा में एक भयावह जल त्रासदी हुई थी। इंद्रा देवी ने उस मनहूस सुबह को याद करते हुए बताया कि कैसे उनके सात वर्षीय बेटे जोगेंद्र की मौत दूषित पानी पीने से हो गई थी। नाश्ते के कुछ देर बाद ही परिवार के सभी छह सदस्य बीमार पड़ गए, जिसमें उनका बेटा जोगेंद्र उनकी आंखों के सामने बेहोश हो गया और अंततः उसने दम तोड़ दिया।
इस त्रासदी ने पूरे मोहल्ले को अपनी चपेट में ले लिया था। हर घर में मातम का माहौल था। लोगों को सांसों में जहर घुलने का डर सता रहा था। कई परिवारों ने अपने सदस्यों को खो दिया था, किसी का बेटा, तो किसी का पति या भाई इस दूषित जल का शिकार हुआ था।
इंद्रा देवी ने बताया कि जब अधिकारी मुआवजे के तौर पर केवल 10,000 रुपये लेकर बस्ती में पहुंचे, तो लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्हें लगा कि अधिकारियों की नजरों में मरने वाले जीवन की कीमत सिर्फ इतनी ही है। इंद्रा देवी ने उस मुआवजे की राशि को अधिकारियों पर फेंक दिया और कहा कि इसे पानी की टंकी साफ कराने में लगाओ, ताकि किसी और मां को अपने बेटे को न खोना पड़े। अधिकारियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था।
यह घटना परिवार के लिए एक गहरा सदमा थी, जिसकी पीड़ा आज भी उनके चेहरों पर देखी जा सकती है।
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