सुब्रह्मण्य षष्ठी 2025: भगवान कार्तिकेय को इन मंत्रों से करें प्रसन्न
सुब्रह्मण्य षष्ठी, जिसे स्कंद षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। दक्षिण भारत में यह पर्व विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, हर माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर स्कंद षष्ठी मनाई जाती है, लेकिन मार्गशीर्ष माह में पड़ने वाली स्कंद षष्ठी को सुब्रह्मण्य षष्ठी के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान कार्तिकेय की विधिवत पूजा-अर्चना करने से साधकों के जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। माना जाता है कि भगवान कार्तिकेय अपने भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण करते हैं। इस विशेष दिन पर, भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी सिद्ध होता है।
इस पर्व पर भक्तगण भगवान कार्तिकेय को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न मंत्रों का पाठ करते हैं। कार्तिकेय गायत्री मंत्र का जाप विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, ‘ॐ शारवाना-भावाया नमः’ जैसे मंत्रों का जप भी पुण्यकारी होता है। इन मंत्रों के जाप से न केवल आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
भगवान कार्तिकेय, जिन्हें मुरुगन और सुब्रहमन्य के नामों से भी जाना जाता है, शक्ति, साहस और ज्ञान के प्रतीक हैं। उनकी पूजा से भक्तों को आध्यात्मिक बल और विजय की प्राप्ति होती है। सुब्रह्मण्य षष्ठी का यह पर्व भक्तों को भगवान कार्तिकेय के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।
