आगामी बजट 2026-27: आत्मनिर्भर भारत पर मोदी सरकार का जोर
आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में मोदी सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा को और अधिक मजबूती देने की योजना बना रही है। गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शित होने वाली आत्मनिर्भर भारत की झांकी की झलक इस बजट की मुख्य थीम भी बन सकती है। सरकार का प्राथमिक ध्यान देश को उन महत्वपूर्ण वस्तुओं के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है, जिनके लिए वर्तमान में आयात पर निर्भरता है।
वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं और विभिन्न देशों द्वारा व्यापार प्रतिबंधों को देखते हुए, भारत अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। बजट में विशेष रूप से उन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के प्रावधान किए जा सकते हैं, जहां कच्चे माल से लेकर तैयार माल तक का उत्पादन देश में ही हो सके। इसके लिए नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ मौजूदा इकाइयों की क्षमता विस्तार और उत्पादन लागत को कम करने के लिए विभिन्न प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहन (इंसेंटिव) की घोषणा की जा सकती है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में विभिन्न औद्योगिक संगठनों, बाजार विशेषज्ञों और एमएसएमई हितधारकों के साथ बजट-पूर्व चर्चाएं की हैं। इन चर्चाओं का उद्देश्य ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार करना है। सूत्रों के अनुसार, विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश की विकास दर को वर्तमान सात प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखना आवश्यक है, जो कि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में वृद्धि के बिना संभव नहीं है।
घरेलू अर्थव्यवस्था में मांग को बनाए रखने और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए, बजट में सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मैग्नेट, क्वांटम कंप्यूटिंग और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में कच्चे माल के उत्पादन पर विशेष बल दिया जा सकता है। सरकार रोजगार बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर भी अपना खर्च जारी रखेगी, जिसमें सालाना लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि अपेक्षित है।
‘मेक इन इंडिया’ पहल के बाद, 2020 में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत दर्जन भर से अधिक क्षेत्रों में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) की शुरुआत की गई थी। इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में इससे विनिर्माण को बढ़ावा मिला है, हालांकि कुछ अन्य क्षेत्रों में अपेक्षित परिणाम अभी तक नहीं मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बार के बजट में मैन्युफैक्चरिंग को और अधिक गति देने के लिए अतिरिक्त उपाय किए जा सकते हैं।
बता दें कि पिछले कुछ समय से सरकार कारोबार को आसान बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में आयकर स्लैब में बदलाव, सितंबर में जीएसटी दरों में कटौती, और हाल ही में लंबित श्रम संहिताओं को लागू करने की अधिसूचना जारी की गई है। ‘जन विश्वास बिल’ का अगला चरण भी जल्द ही पेश होने की उम्मीद है। इन सब कदमों से मैन्युफैक्चरिंग प्रोत्साहन के लिए एक मजबूत आधार तैयार हो गया है, और अब इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की कोशिश की जाएगी।
