नए श्रम कानूनों से 77 लाख नौकरियों का मार्ग प्रशस्त, बेरोजगारी दर में आएगी कमी
नए श्रम सुधारों के लागू होने से भारत में रोजगार के अवसरों में भारी वृद्धि होने की संभावना है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन सुधारों से जहां बेरोजगारी दर में 1.3% की कमी आ सकती है, वहीं 77 लाख नए रोजगार सृजित हो सकते हैं। यह भारत के श्रमिक बाजार के लिए एक बड़े बूस्टर डोज के समान है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नए श्रम कानूनों के लागू होने से श्रम बल में औपचारिक क्षेत्र की हिस्सेदारी में कम से कम 15% की वृद्धि होगी। वर्तमान में, पीएलएफएस (आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण) के आंकड़ों के अनुसार, औपचारिक श्रमिक कुल श्रम बल का लगभग 60.4% हैं, जो बढ़कर 75.5% तक पहुंच सकते हैं। इससे न केवल श्रमिकों को बेहतर नौकरी की सुरक्षा मिलेगी, बल्कि सामाजिक सुरक्षा कवरेज में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। अनुमान है कि सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़कर 85% तक पहुंच सकता है, जो देश के श्रमिक पारिस्थितिकी तंत्र को काफी मजबूत करेगा।
आर्थिक दृष्टिकोण से भी इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। लगभग 30% की बचत दर को ध्यान में रखते हुए, यह अनुमान लगाया गया है कि सुधारों के लागू होने के बाद प्रति व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 66 रुपये की खपत बढ़ सकती है। इससे मध्यम अवधि में कुल खपत में 75,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी, जो घरेलू खर्च को बढ़ाएगा और आर्थिक विकास को एक नई गति प्रदान करेगा।
वर्तमान में, भारत में लगभग 44 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिनमें से 31 करोड़ ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं। यदि इनमें से 20% श्रमिक भी अनौपचारिक क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र में स्थानांतरित हो जाते हैं, तो लगभग 10 करोड़ लोगों को बेहतर नौकरी सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा लाभ और औपचारिक रोजगार के अन्य फायदे सीधे तौर पर मिल सकते हैं। इन बदलावों के साथ, अगले दो से तीन वर्षों में भारत का सामाजिक सुरक्षा कवरेज 80-85% तक पहुंचने की उम्मीद है, जो एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
