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डीएमसीएच सुपर स्पेशियलिटी: 13 महीने बाद भी स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज निराश

By Nov 25, 2025

दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) परिसर में स्थित अत्याधुनिक 210 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन हुए 13 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि यहां की व्यवस्थाएं अब तक पटरी पर नहीं उतर पाई हैं। उद्घाटन के समय अस्पताल प्रशासन ने इंडोर सेवाएं शुरू करने का दावा किया था, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। वर्तमान में केवल सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी का संचालन हो रहा है, जबकि इंडोर व्यवस्था अभी भी ठप पड़ी है।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में गैस्ट्रोलोजी, प्लास्टिक सर्जरी, कार्डियोलोजी, नेफ्रोलोजी, न्यूरोलोजी और न्यूरो सर्जरी जैसे छह महत्वपूर्ण विभागों का संचालन होना था। पांचवें तल पर अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर (ओटी) की व्यवस्था भी की गई है। यदि ये विभाग सुचारू रूप से कार्य करते, तो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल पाता और उन्हें रेफर होने की पीड़ा से मुक्ति मिलती।

वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। मंगलवार को जब पड़ताल की गई तो प्रथम तल पर गैस्ट्रोलोजी और दूसरे तल पर नेफ्रोलोजी विभाग का हाल भी संतोषजनक नहीं मिला। नेफ्रोलोजी विभागाध्यक्ष ने बताया कि ओपीडी में हर दिन 25 से 30 मरीज आते हैं, लेकिन 20 बेड की इंडोर व्यवस्था होने के बावजूद एक भी मरीज भर्ती नहीं है। इसका मुख्य कारण डॉक्टरों और आवश्यक स्टाफ की अनुपलब्धता है। इसी तरह, तीसरे तल पर प्लास्टिक सर्जरी और बर्न विभाग में भी 20 बेड की व्यवस्था के बावजूद चिकित्सक और स्टाफ की कमी के कारण वार्ड खाली पड़े हैं और इंडोर सेवा पूरी तरह बंद है।

भवन के ग्राउंड फ्लोर पर रेडियोलॉजी और अधीक्षक कार्यालय ही ऐसे विभाग हैं जहां काम सुचारू रूप से चल रहा है। बाकी पूरा भवन सूना पड़ा है, जहां सिर्फ ताला बंद कमरे और मरीजों की निराशा ही दिखाई देती है। ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि जब डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं हैं, तो आउटसोर्सिंग पर रखे गए टेक्नीशियन और नर्सों को केवल वेतन देने का क्या औचित्य है। कमरे तैयार हैं, बेड लगे हैं, लेकिन मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है।

जनता उम्मीद लेकर इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में आती है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में निराश होकर लौट जाती है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को यह समझना होगा कि जनता के लिए केवल भवन और बेड नहीं, बल्कि कार्यरत डॉक्टर और वास्तविक सेवाएं ही सुपर स्पेशियलिटी का असली मतलब हैं। जल्द से जल्द डॉक्टरों और स्टाफ की नियुक्ति कर इन सुविधाओं को चालू किया जाना चाहिए, ताकि जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल सके।

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