IND vs SA: बिखरी रणनीति, ढहती बल्लेबाजी, टीम इंडिया की क्या हो गई हालत?
गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन भारतीय क्रिकेट टीम की बल्लेबाजी पूरी तरह ढह गई। दक्षिण अफ्रीका के 489 रनों के जवाब में, जिसे कुलदीप यादव ने ‘सड़क’ जैसा सपाट बताया था, भारतीय बल्लेबाज 201 रनों पर ही ढेर हो गए। इस विनाश का मुख्य सूत्रधार रहे 6 फुट 8 इंच लंबे मार्को यानसेन, जिन्होंने न केवल पहली पारी में 93 रन बनाए, बल्कि 6 विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।
यानसेन की घातक गेंदबाजी ने भारत की बल्लेबाजी की कमजोरियों को पूरी तरह उजागर कर दिया। दिन का खेल समाप्त होने तक दक्षिण अफ्रीका ने बिना कोई विकेट खोए 26 रन बना लिए थे और अब उनकी कुल बढ़त 314 रनों की हो चुकी है। ऐसे में, भारतीय टीम के लिए मैच और सीरीज बचाना एक अत्यंत कठिन चुनौती बन गया है।
यह सीरीज भारतीय टीम प्रबंधन की रणनीति और टीम चयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पिछले मैच में वॉशिंगटन सुंदर को नंबर तीन पर उतारना और इस मैच में साई सुदर्शन को वही जिम्मेदारी देना, जबकि सुदर्शन का टेस्ट रिकॉर्ड साधारण रहा है, टीम की सोच पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इसी तरह, ऑलराउंडरों पर अत्यधिक भरोसा भी उल्टा पड़ता दिख रहा है। अक्षर पटेल को बाहर कर नीतीश कुमार रेड्डी को शामिल किया गया, जिन्होंने पहली पारी में केवल छह ओवर फेंके और 7वें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए मात्र 10 रन बनाए।
भारतीय टीम का पतन तब शुरू हुआ जब जिम्मेदारी दिखनी चाहिए थी। 95 रनों पर दो विकेट गिरने के बाद, 122 रन तक पहुंचते-पहुंचते टीम के सात विकेट गिर चुके थे। साई सुदर्शन (15) ने शॉर्ट गेंद पर बिना सोचे-समझे पुल शॉट खेलकर अपना विकेट गंवाया, जो पिछले मैच में हुए आउट की याद दिलाता है। ध्रुव जुरैल ने ऑफ स्टंप के बाहर की धीमी गेंद को टी-20 अंदाज में खेलने का प्रयास किया, जो पूरी तरह गलत साबित हुआ। यानसेन की शरीर पर निशाना साधती गेंदों ने जडेजा और नीतीश रेड्डी को भी असहज कर दिया।
कप्तान पंत से ऐसे संकट के समय संयम की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने भी एक बेतुका क्रॉस-बल्ले का शॉट खेलने का प्रयास किया और अपना विकेट गंवा बैठे। जब बाकी बल्लेबाज गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेल रहे थे, तब वॉशिंगटन सुंदर (48) और कुलदीप यादव (19) ने दिखाया कि इस पिच पर टिक कर रन बनाए जा सकते थे। इन दोनों ने लगभग एक सत्र तक बल्लेबाजी कर 62 रनों की साझेदारी निभाई। यदि यही धैर्य शीर्ष क्रम के बल्लेबाज दिखाते, तो शायद कहानी कुछ और होती।
