तिलक नगर विकास के ‘टीके’ से वंचित, मथुरा-वृंदावन की कॉलोनियों का बुरा हाल
मथुरा-वृंदावन को धर्मनगरी के रूप में विकसित करने के लिए सरकारी स्तर पर भले ही करोड़ों की योजनाओं पर काम चल रहा हो, लेकिन शहर की कॉलोनियों की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। मथुरा के तिलक नगर मोहल्ले की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, जहां सड़कों पर अनगिनत गड्ढे और जल निकासी की गंभीर समस्या ने स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। निगम के वार्ड नंबर 33 में स्थित इस कॉलोनी की जर्जर सड़कें लोगों के लिए आवागमन में बड़ी बाधा बन रही हैं।
कॉलोनी की सड़कें कई जगहों पर कच्ची हैं और जगह-जगह बने गड्ढों के कारण राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जरा सी बारिश होते ही पूरी कॉलोनी तालाब में तब्दील हो जाती है, जिससे लोगों का घरों से निकलना दूभर हो जाता है। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे गंदगी का अंबार लग जाता है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। अनीता देवी नामक स्थानीय निवासी ने बताया, “जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश के दौरान हमारे घरों में पानी घुस जाता है, जिससे हमें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।”
बरसात के दिनों में तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं। नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है और पूरी कॉलोनी जलमग्न हो जाती है। अनिल शर्मा ने कहा, “बरसात के समय हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोगों के घरों में पानी घुस जाता है और सड़कों पर जलभराव हो जाता है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद नगर निगम की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।” गीता देवी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “मोहल्ले में जलभराव की समस्या इस कदर बढ़ चुकी है कि यहां से निकलना मुसीबत से कम नहीं रहा। थोड़ी-सी बारिश होते ही सड़कें तालाब में बदल जाती हैं, जिससे स्थानीय निवासियों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।”
जलभराव के कारण खाली पड़े प्लॉट भी पानी से भर जाते हैं, जिससे मच्छरों की संख्या में वृद्धि हो रही है और बच्चे व बुजुर्ग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पूनम दिनेश ने बताया, “खाली पड़े प्लॉटों में हो रहे जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इस जलभराव के कारण बच्चे व बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं। मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।”
सड़कों की खस्ताहाली के साथ-साथ स्ट्रीट लाइटों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महीनों से स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं, जिसके कारण रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। इस अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं और चोरी, छीना-झपटी जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। सुरेंद्र सिंह ने बताया, “कॉलोनी में स्ट्रीट लाइट न होने के कारण रात्रि में अंधकार छाया रहता है, जिससे लोगों को आने-जाने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का खतरा बढ़ गया है।” अंधेरे के कारण महिलाओं और बच्चों का अकेले बाहर निकलना असुरक्षित हो गया है। नरेश भदौरिया ने बताया, “कॉलोनी में गंदे पानी का निकास न होने से कॉलोनी में कीचड़ जमा हो रही है। गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि बच्चे व बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं।”
तिलक नगर के निवासी लंबे समय से इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। वे मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सड़कों की मरम्मत की जाए, जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए और स्ट्रीट लाइटें लगवाई जाएं, ताकि वे एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में जीवन यापन कर सकें। विकास का ‘टीका’ इन कॉलोनियों तक कब पहुंचेगा, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
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