पीलीभीत जिला अस्पताल में लगेगा ETP-STP प्लांट, गंदगी और बैक्टीरिया का होगा खात्मा
पीलीभीत जिला अस्पताल में अब मरीजों के इलाज के साथ-साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। अस्पताल के वार्डों और विभिन्न प्रयोगशालाओं से निकलने वाले दूषित पानी और मेडिकल अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान के लिए ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) और एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की स्थापना को मंजूरी मिल गई है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए शासन द्वारा दो करोड़ रुपये के बजट की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन आधुनिक संयंत्रों के स्थापित होने से न केवल अस्पताल परिसर में फैलने वाली गंदगी और दुर्गंध से निजात मिलेगी, बल्कि बैक्टीरिया जनित संक्रमण के खतरों को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।nnवर्तमान में, जिला अस्पताल के विभिन्न विंगों जैसे ब्लड बैंक, लैब और वार्डों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में मेडिकल अपशिष्ट और गंदा पानी निकलता है। इस अपशिष्ट को सीधे नदी-नालों में प्रवाहित करने से गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इस समस्या को देखते हुए, शासन ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में ईटीपी और एसटीपी प्लांट की स्थापना को अनिवार्य कर दिया है। पीलीभीत जिला अस्पताल में स्थापित होने वाले ये प्लांट प्रतिदिन पांच हजार किलोलीटर (केएलडी) क्षमता के होंगे, जो सीवेज और मेडिकल अपशिष्ट से निकलने वाले दूषित पानी का प्रभावी ढंग से शोधन करेंगे।nnयह प्लांट तीन चरणों में काम करते हुए पानी को पूरी तरह से शुद्ध करेगा। अभी तक, अस्पताल से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का निपटान एक निजी फर्म के माध्यम से किया जाता है, लेकिन पानी के शोधन के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं थी। नए प्लांट के शुरू होने से केमिकल युक्त पानी और हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करके ही उसे प्रवाहित किया जाएगा, जिससे जल प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।nnराष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा बायोमेडिकल वेस्ट के निपटान को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश, कई निजी अस्पताल संचालक इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के अधीन आने वाले लगभग 100 से अधिक अस्पतालों और नर्सिंग होम में से करीब 30 फीसदी में अभी तक एसटीपी और ईटीपी प्लांट स्थापित नहीं हुए हैं। जबकि नियम यह है कि 10 बेड वाले प्रत्येक अस्पताल और नर्सिंग होम में इन संयंत्रों का होना अनिवार्य है। शासन द्वारा आदेश जारी होने के बाद सीएमओ कार्यालय की ओर से नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। कई अस्पताल अभी भी बिना ईटीपी/एसटीपी प्लांट के चल रहे हैं और कुछ जगहों पर तो बायोमेडिकल वेस्ट को खुले में फेंकने की शिकायतें भी हैं, जो संक्रमण का एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।nnसंबंधित अधिकारियों का कहना है कि शासन की ओर से ईटीपी और एसटीपी प्लांट की स्थापना के लिए दो करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया गया है। इन प्लांटों के लगने से मेडिकल अपशिष्ट का बेहतर ढंग से निस्तारण सुनिश्चित होगा और संक्रमण का खतरा समाप्त हो जाएगा। बजट प्राप्त हो चुका है और जल्द ही इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा।”
कराया जाएगा।
