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भारतीय शिक्षा बोर्ड की संगोष्ठी: संस्कृति और नैतिक मूल्यों पर ज़ोर

By Nov 24, 2025

अलीगढ़ के कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर में 20 नवंबर 2025 को भारतीय शिक्षा बोर्ड की मंडल स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में अलीगढ़ मंडल के विभिन्न विद्यालयों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य और प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय शिक्षा बोर्ड के महत्व को समझाना और इसे अधिक से अधिक विद्यालयों में अपनाने के लिए प्रेरित करना था।nnकार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. एन. पी. सिंह, जो भारतीय शिक्षा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं, ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान आधुनिक शिक्षा पद्धतियों में भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का गहरा अभाव देखा जा रहा है। इस कमी के कारण बच्चों में नैतिक पतन की प्रवृत्ति बढ़ रही है। डॉ. सिंह ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का लक्ष्य केवल बच्चों को आधुनिक ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, वेद, उपनिषद और गीता जैसी आध्यात्मिक शिक्षाओं से भी जोड़ना है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।nnडॉ. सिंह ने आगे कहा कि बच्चों का संपूर्ण विकास केवल किताबी ज्ञान से संभव नहीं है। इसके लिए उनमें अच्छे संस्कार और मजबूत नैतिक मूल्यों को विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ जीवन के सही मूल्य और संस्कार सिखाना है।nnसंगोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं मण्डलायुक्त संगीता सिंह ने बच्चों के चरित्र निर्माण में माता-पिता और आदर्श शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों को सही दिशा देने के लिए केवल अच्छे विद्यालयों का होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ पारिवारिक वातावरण और संस्कार-युक्त शिक्षा का भी होना अनिवार्य है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि बच्चों को प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धतियों से जोड़ने के लिए भारतीय शिक्षा बोर्ड से अवश्य जुड़ें।nnसंगोष्ठी का संचालन सुनील शास्त्री, राज्य प्रभारी, भारत स्वाभिमान ने किया। इस अवसर पर पतंजलि परिवार के कई प्रमुख सदस्य और मंडल के 300 से अधिक विद्यालयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जुड़ने और इसके उद्देश्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। यह संगोष्ठी भारतीय शिक्षा बोर्ड के उद्देश्यों और इसके महत्व को समझने का एक उत्कृष्ट अवसर साबित हुई, जिसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि शिक्षा केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों में संस्कार, नैतिकता और भारतीय संस्कृति की भावना का भी संचार करे संचार।”
विकास भी करे।

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