99 सिम से देशभर में ठगी, हरदोई में खुला साइबर अपराधियों का नेटवर्क
साइबर अपराधियों का जाल अब हरदोई तक फैल चुका है, और ठगी में इस्तेमाल हो रहे मोबाइल नंबरों की जांच ने एक चौंकाने वाले मामले का खुलासा किया है। जब 3402 सिम कार्डों का सत्यापन किया गया, तो उनमें से 99 ऐसे निकले जिनका इस्तेमाल देश के विभिन्न हिस्सों में की गई ठगी की वारदातों में हुआ था।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिन लोगों के नाम पर ये सिम जारी किए गए थे, उन्हें इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। इन लोगों ने वर्ष 2022-23 के दौरान गांव में सिम बेचने आए एजेंटों से ये सिम खरीदे थे। इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए, सिम कंपनी के अधिकृत विक्रेता के खिलाफ कोतवाली शहर में एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह पहला मामला नहीं है जब हरदोई से जुड़े सिम कार्डों का इस्तेमाल ठगी में सामने आया हो।
देशभर में लगातार बढ़ रहे ऑनलाइन फ्राड, बैंक खाते खाली होने और फर्जी कॉल्स के पीछे इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबरों की जांच में हरदोई का नाम बार-बार सामने आ रहा है। वर्ष 2022-23 के दौरान जारी किए गए कई सिम कार्ड अब संदिग्ध पाए जा रहे हैं। इन सिमों को केवल दुकानों से ही नहीं बेचा गया, बल्कि कुछ एजेंट गांव-गांव जाकर भी इनकी बिक्री करते रहे। इसी दौरान यह बात सामने आई कि एक संगठित नेटवर्क फर्जी तरीकों से सिम एक्टिवेट कर साइबर ठगों तक पहुंचा रहा था।
फर्जीवाड़े का तरीका बेहद खतरनाक था। एजेंट पहले किसी उपभोक्ता की एक वैध आईडी पर उसे एक सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे, लेकिन उसी आईडी पर दो और अतिरिक्त सिम निकाल लेते थे। इन सिमों को बाद में ऊंचे दामों पर उन लोगों को बेचा जाता था जो अपनी पहचान छिपाना चाहते थे या साइबर ठगी जैसे अपराधों में शामिल थे।
साइबर सेल द्वारा हरदोई को 3402 संदिग्ध सिम की जांच के लिए भेजा गया था, जिसमें से 2111 का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। इनमें 99 सिम ऐसे पाए गए जो हरदोई से फर्जी तरीके से जारी किए गए थे। अभी भी 736 सिम की जांच जारी है, जिससे यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।
इस मामले में हरदोई के सिविल लाइन निवासी एजेंट आशुतोष गुप्ता के खिलाफ कोतवाली शहर में एफआईआर दर्ज कराई गई है। चौकी प्रभारी रेलवेगंज विश्वास शर्मा की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर की साइबर सेल द्वारा जांच की जाएगी। सीओ सिटी अंकित मिश्र ने बताया कि जांच में कई और मामले सामने आ सकते हैं।
यह स्थिति जिले में सिम बिक्री के नाम पर चल रही अनियमितताओं को उजागर करती है, जो साइबर अपराधियों के लिए एक खुला रास्ता बनी हुई थीं। पहले भी जिले में कई बार अवैध तरीके से सिम कार्ड बेचने, फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने और एक ही आईडी पर कई सिम एक्टिवेट करने के मामले पकड़े जा चुके हैं।
