विकास फंड को वोट से जोड़ने पर गरमाई सियासत, सुप्रिया सुले ने की EC से कार्रवाई की मांग
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राकांपा नेता अजित पवार के एक बयान ने राज्य की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। पुणे जिले की बारामती में नगर पंचायत चुनाव प्रचार के दौरान, अजित पवार ने कथित तौर पर मतदाताओं से कहा कि यदि वे उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को जिताते हैं तो शहर में विकास कार्यों के लिए फंड की कोई कमी नहीं होगी, लेकिन यदि वे उन्हें ‘रिजेक्ट’ करते हैं तो वे भी मतदाताओं को ‘रिजेक्ट’ कर देंगे। इस बयान को राकांपा (शरद चंद्र पवार) की वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले ने बेहद गंभीर बताया है और निर्वाचन आयोग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।
सुप्रिया सुले ने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र में इस तरह के बयानों पर निर्वाचन आयोग की पैनी नजर होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “तुम्हारे पास वोट हैं, और मेरे पास फंड”। यह टिप्पणी एक मंत्री द्वारा मतदाताओं को धमकाने के समान है। सुले ने यह भी जोड़ा कि हाल के दिनों में निर्वाचन आयोग इस तरह के मामलों पर सक्रियता नहीं दिखा रहा है, जिसका खामियाजा उनकी पार्टी को भी भुगतना पड़ा था, भले ही उनके पास सभी आवश्यक कागजात थे।
पार्टी के प्रवक्ता महेश तपासे ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग को इस पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए और अजित पवार के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि अजित पवार को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। महायुति सरकार में वित्त विभाग का जिम्मा संभाल रहे पवार ने अपने बयान में कहा था कि यदि राकांपा के सभी 18 उम्मीदवार जीतते हैं तो फंड की कोई कमी नहीं होगी, लेकिन यदि मतदाता उन्हें अस्वीकार करते हैं तो वह भी उन्हें अस्वीकार कर देंगे।
इस बीच, अजित पवार की ओर से इस बयान पर सफाई भी दी गई है। उन्होंने कहा है कि यह कोई धमकी नहीं थी, बल्कि एक सामान्य टिप्पणी थी। उन्होंने कहा कि उनके कहने का मतलब था कि यदि जनता उन्हें चुनेगी तो वह उनके लिए काम करेंगे। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है और इसे सत्ता का दुरुपयोग और मतदाताओं को धमकाने का प्रयास बताया है। इस घटनाक्रम के बीच, राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
