बिहार में लघु उद्योगों को गुजरात की राह पर लाने की मांग, सिंगल विंडो सिस्टम की वकालत
बिहार में छोटे और मध्यम उद्योगों के विकास को गति देने के लिए उद्योगपतियों ने राज्य सरकार से गुजरात मॉडल की तर्ज पर सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की मांग की है। उद्योगपतियों का तर्क है कि वर्तमान में किसी भी उद्योग की स्थापना के लिए विभिन्न सरकारी विभागों से सात से आठ प्रकार के प्रमाणपत्र और अनुमतियों की आवश्यकता होती है। इन प्रमाणपत्रों के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटना न केवल समय लेने वाला है, बल्कि प्रक्रिया को जटिल और खर्चीला भी बनाता है।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सभी आवश्यक अनुमतियाँ और प्रमाणपत्र एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे उद्योग स्थापित करने वालों को बार-बार विभिन्न सरकारी दफ्तरों में जाने की जहमत नहीं उठानी पड़ती। बेगूसराय स्थित उषा एयर गैस फैक्ट्री के मालिक अविनाश कुमार बताते हैं कि गुजरात जैसे राज्यों में उद्योग विभाग के भीतर ही सभी संबंधित कार्यालयों के कक्ष होते हैं, जिसे सिंगल विंडो सिस्टम कहा जाता है। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था बिहार में भी लागू होनी चाहिए।
अविनाश कुमार ने कहा कि यदि सभी आवश्यक कागजात और प्रमाणपत्र एक ही छत के नीचे मिल जाएं, तो न केवल नए उद्योग स्थापित करने वालों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि मौजूदा उद्योगों का भी तेजी से विकास होगा। उन्होंने कहा कि एक उद्योग स्थापित करने के लिए केवल जमीन और धन ही नहीं, बल्कि विभिन्न सरकारी विभागों से क्लीयरेंस भी आवश्यक है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।
बेगूसराय में मेडिकल और इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए दो एयर गैस प्लांट संचालित होते हैं, जो मध्यम वर्गीय उद्योगों की श्रेणी में आते हैं। अविनाश कुमार बताते हैं कि इन जैसे प्लांट की स्थापना में लगभग एक करोड़ रुपये का निवेश होता है, जिसके अतिरिक्त अन्य परिचालन खर्चे भी होते हैं। इन प्लांट्स से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब पचास परिवारों का भरण-पोषण होता है। उन्होंने बताया कि पहले इन प्लांट्स से विभिन्न जिलों में एयर गैस सिलेंडर भेजे जाते थे, लेकिन अब सप्लाई सिर्फ बेगूसराय जिले तक सीमित रह गई है, क्योंकि अन्य जिलों में भी ऐसे प्लांट स्थापित हो गए हैं।
उद्योगपतियों का मानना है कि सिंगल विंडो सिस्टम लागू होने से बिहार में निवेश का माहौल सुधरेगा, उद्यमियों का विश्वास बढ़ेगा और राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यह कदम बिहार को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
