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फतेहपुर के चार गांवों में क्रोमियम-पारा का कहर, एम्स की टीम से जांच की आस

By Nov 23, 2025

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में औद्योगिक इकाइयों के जहरीले अपशिष्ट ने भूगर्भ जल को प्रदूषित कर दिया है, जिसका सीधा असर गोधरौली, बनखेड़ा, आशापुर और अभयपुर सहित चार गांवों के 143 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इन ग्रामीणों के शरीर में क्रोमियम और पारे (मर्करी) की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई है। यह चिंताजनक स्थिति तब सामने आई है जब स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने इन गांवों के 171 लोगों की स्वास्थ्य जांच की, जिसमें 147 लोगों में क्रोमियम की अधिकता और दो लोगों में पारे की अधिकता पाई गई।

स्थानीय स्वास्थ्य विभाग इन प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य की प्रतिमाह निगरानी कर रहा है, लेकिन ग्रामीण अब एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) के चिकित्सकों की विशेषज्ञ टीम से विस्तृत स्वास्थ्य जांच की उम्मीद कर रहे हैं। कानपुर के क्रोमियम प्रभावित गांवों में एम्स की टीम पहले ही पहुंच चुकी है और स्वास्थ्य परीक्षण कर चुकी है, लेकिन फतेहपुर की टीम का अब तक इंतजार है।

यह प्रदूषण औद्योगिक इकाइयों के डंप किए गए कचरे से फैला है। गोधरौली गांव विशेष रूप से प्रभावित है, जहां बड़ी मात्रा में औद्योगिक अपशिष्ट डंप किया गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की जांच के बाद, अभयपुर और आशापुर गांवों के पास भी ऐसे अपशिष्ट डंप पाए गए थे। इन स्थलों को पहले तार की फेंसिंग से सुरक्षित किया गया था और अब कुछ स्थानों पर सीमेंट की दीवारें खड़ी की जा रही हैं ताकि अपशिष्ट को और फैलने से रोका जा सके। गोधरौली में ग्राम पंचायत द्वारा दो और डंपिंग यार्ड को चारदीवारी बनाकर सुरक्षित किया जा रहा है।

ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि विभागों की सक्रियता केवल तभी दिखाई देती है जब एनजीटी में सुनवाई का समय आता है। इसके अलावा, वे निष्क्रिय रहते हैं। पूरे गांव में, तालाबों, रास्तों के किनारे और खाली पड़ी जगहों पर औद्योगिक अपशिष्ट के ढेर लगे हुए हैं, जो लगातार पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बने हुए हैं। ग्रामीण इस मामले में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि एम्स की टीम के आने से इस गंभीर समस्या का समाधान निकलेगा और उनके स्वास्थ्य की सही जांच हो सकेगी।

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