दिल्ली में बेखौफ नाबालिग: कानून की धज्जियां उड़ाते किशोरों से बढ़ी हिंसक वारदातों की संख्या
दिल्ली में नाबालिगों द्वारा की जा रही हिंसक घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे शहर में अपराध का माहौल चिंताजनक रूप से बढ़ गया है। हाल के दिनों में, किशोरों द्वारा किए गए अपराधों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि हुई है, जो कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रही है।
पूर्वी दिल्ली के यमुनापार क्षेत्र में पिछले दो महीनों के भीतर नाबालिगों ने चाकू का इस्तेमाल कर तीन हत्याओं को अंजाम दिया है। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि नाबालिग अपराधियों में पुलिस का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है। सड़कों पर वे कानून की धज्जियां उड़ाते हुए देखे जा रहे हैं। ज्योति नगर इलाके में हुई एक हत्या इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहाँ एक 15 वर्षीय नाबालिग की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। इससे पहले सीलमपुर और दयालपुर इलाकों में भी नाबालिगों द्वारा चाकू से हत्याएं कर कानून व्यवस्था को चुनौती दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार, ज्योति नगर इलाके में मृतक अल फैज (15 वर्ष) की हत्या करने वाला 16 वर्षीय नाबालिग नशे का आदी बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को इस जघन्य अपराध का जरा भी पछतावा नहीं है। मृतक अल फैज से पहले भी आरोपी का उससे कई बार विवाद हो चुका था।
मृतक के परिवार ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि जिस नाबालिग ने यह वारदात अंजाम दी है, उस पर एक बालिग की तरह केस चलाया जाना चाहिए और उसे तथा उसके भाई को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। यह मांग नाबालिगों द्वारा किए जा रहे गंभीर अपराधों के प्रति समाज में बढ़ते गुस्से और न्याय की अपेक्षा को दर्शाती है।
इस बढ़ती समस्या पर मनोविज्ञानी डॉ. माला वोहरा खन्ना ने चिंता व्यक्त करते हुए अभिभावकों को महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों के व्यवहार में आ रहे तेजी से बदलावों को पहचानना चाहिए, क्योंकि किसी भी बच्चे का व्यवहार अचानक नहीं बदलता। अभिभावकों को यह ध्यान देना चाहिए कि उनके बच्चे दूसरों के प्रति कैसा भावनात्मक व्यवहार करते हैं, क्या वे अन्य बच्चों को परेशान करके खुश होते हैं, वे किस हद तक झूठ बोलने लगे हैं, बड़ों का सम्मान कर रहे हैं या नहीं, और वे टीवी व मोबाइल पर किस तरह की सामग्री देख रहे हैं। यदि बच्चे हिंसा से जुड़े या हथियारों के वीडियो देख रहे हैं, तो यह समझना चाहिए कि उनका व्यवहार आपराधिक हो रहा है। ऐसे समय में अभिभावकों को बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए और उन्हें सही और गलत के बीच अंतर समझाना चाहिए।
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