जहरीले केमिकल से 24 बच्चों की मौत: कोल्ड्रिफ सिरप में डाय-एथिलीन ग्लाइकाल की घातक मात्रा
मध्य प्रदेश में विषाक्त कफ सिरप के कारण 24 मासूमों की जान लेने वाले मामले में विशेष जांच दल (एसआइटी) ने आरोपित पांड्या केमिकल कंपनी के मालिक शैलेष पांड्या से पूछताछ कर अहम सुराग जुटाए हैं। जांच में पता चला है कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स ने पांड्या केमिकल से 50 किलोग्राम डाय-एथिलीन ग्लाइकाल (डीईजी) की मांग की थी।
आरोप है कि पांड्या केमिकल ने जल्दबाजी में फार्मा ग्रेड के बजाय औद्योगिक ग्रेड का डीईजी सप्लाई कर दिया। कंपनी 215 किलोग्राम के पैक में फार्मा ग्रेड डीईजी की आपूर्ति करती है, लेकिन इस बार औद्योगिक ग्रेड का लूज माल भेजा गया। इसी चूक के कारण कोल्ड्रिफ कफ सिरप में डाय-एथिलीन ग्लाइकाल की मात्रा 48.6 प्रतिशत तक पाई गई, जबकि यह केवल 0.48 प्रतिशत ही होनी चाहिए थी। यही अत्यधिक मात्रा इन 24 बच्चों की मौत का कारण बनी।
यह अत्यंत चिंताजनक है कि कंपनी में केमिकल पहुंचने के बाद उसकी गुणवत्ता की जांच नहीं की गई। पांड्या केमिकल के मालिक शैलेष पांड्या को हाल ही में चेन्नई से गिरफ्तार किया गया था और वह तीन दिन की पुलिस रिमांड पर है। एसआइटी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह केमिकल कहां से खरीदा गया और किन-किन अन्य पार्टियों को बेचा गया। रॉ मटेरियल सप्लाई से संबंधित दस्तावेजों की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
एसआइटी चीफ परासिया एसडीओपी जितेंद्र जाट के अनुसार, यह दुखद घटना कफ सिरप में फार्मा ग्रेड की जगह औद्योगिक ग्रेड के डाय-एथिलीन ग्लाइकाल के इस्तेमाल से हुई। इस मामले में श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स के मालिक जी. रंगनाथन को भी रिमांड पर लिया गया था। छिंदवाड़ा जिले की पांच वर्षीय अंबिका विश्वकर्मा की मौत भी इसी विषाक्त सिरप से हुई थी। इस घटना के बाद दवा निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं, और सतर्कता बढ़ा दी गई है।
