पीएफ घोटाले में फंसे क्लर्क पर कसता शिकंजा, कोर्ट ने जारी किया गैर-जमानती वारंट
नगर पालिका परिषद गोंडा के तत्कालीन लिपिक विपिन प्रकाश श्रीवास्तव के विरुद्ध कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) घोटाले के मामले में अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस आदेश के साथ मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख तय की है। इस वारंट के जारी होने से आरोपित लिपिक की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका परिषद गोंडा के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी विकास सेन ने नगर कोतवाली में तत्कालीन लिपिक विपिन प्रकाश श्रीवास्तव के खिलाफ पीएफ की धनराशि गबन करने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि लिपिक ने कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की राशि काटकर उसे जमा नहीं किया, बल्कि अपने संबंधियों के खातों में हस्तांतरित कर हड़प लिया। इस घोटाले की अनुमानित राशि करीब 3.50 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
पुलिस द्वारा की गई विवेचना के दौरान, केवल लिपिक विपिन प्रकाश श्रीवास्तव ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी हेमा श्रीवास्तव, बेटे व बैंक कर्मी अंकित श्रीवास्तव और प्रतीक श्रीवास्तव के खिलाफ भी आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। इस प्रकार, कुल चार लोगों के खिलाफ अलग-अलग समय पर आरोप पत्र दाखिल किए गए। पहले विवेचक ने 29 दिसंबर 2020 को विपिन प्रकाश श्रीवास्तव के खिलाफ, दूसरे विवेचक ने 26 अगस्त 2021 को अंकित श्रीवास्तव के खिलाफ, और तीसरे विवेचक ने 18 नवंबर 2021 को हेमा श्रीवास्तव व प्रतीक श्रीवास्तव के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में जमा किया था। पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश भी किया था।
इस पीएफ घोटाले ने कर्मचारियों की वर्षों की मेहनत की कमाई को अनिश्चितता में डाल दिया है। घोटाले की वास्तविक राशि का सटीक आंकड़ा अभी भी स्पष्ट नहीं है। प्राथमिकी दर्ज होने और आरोप पत्र दाखिल होने के बीच पुलिस को कई वर्ष लग गए। समय के साथ, विभागीय जांच भी धीमी पड़ गई, जिससे मामले की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं। अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी करना इस बात का संकेत है कि मामले की जांच में तेजी लाई जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
