एटीएम दुर्घटना की जिम्मेदारी अब बैंक की, उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला
भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसले में यह स्पष्ट किया है कि एटीएम मशीन यदि किसी बैंक की है, तो उससे होने वाली किसी भी दुर्घटना की पूर्ण जिम्मेदारी उस बैंक की होगी। आयोग ने बैंक के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें यह कहा गया था कि एटीएम का प्रबंधन एक बाहरी एजेंसी द्वारा किया जाता है, इसलिए बैंक उत्तरदायी नहीं है।
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि एजेंसी को बैंक द्वारा ही अधिकृत किया गया है, इसलिए बैंक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। इसी आधार पर, आयोग ने एक ऐसे मामले में भारतीय स्टेट बैंक को आदेश दिया है कि वह एक ऐसे उपभोक्ता को डेढ़ लाख रुपये का हर्जाना दे, जो एटीएम का दरवाजा गिर जाने से घायल हो गया था। यह राशि उपभोक्ता के इलाज पर हुए खर्च की भरपाई के लिए दी जाएगी।
यह घटना पिछले वर्ष तब हुई जब एक उपभोक्ता, संतोष कुमार श्रीवास्तव, बैंक की जेपी अस्पताल शाखा स्थित एटीएम से रात नौ बजे पैसे निकालने पहुंचे। जैसे ही उन्होंने एटीएम के अंदर प्रवेश करने के लिए दरवाजा खोला, उससे लगी कांच की दीवार उनके ऊपर गिर गई। इस दुर्घटना में उनकी कलाई की नसें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं और वे बेहोश हो गए। साथियों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी कलाई की सभी नसें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और कांच के छोटे टुकड़े घुस गए हैं, जिन्हें सर्जरी से निकालना होगा।
उपभोक्ता को इलाज के लिए सात दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा, जिस पर कुल 1.36 लाख रुपये का खर्च आया। बैंक से शिकायत करने पर, बैंक ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया और कहा कि एटीएम का प्रबंधन एफएसएस एजेंसी करती है, जो बैंक से स्वतंत्र है।
हालांकि, जिला आयोग ने बैंक के इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता बैंक का एक खाताधारक है और बैंक अपनी सेवाओं से जुड़ी किसी भी असुविधा या दुर्घटना के लिए जिम्मेदार है। आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह उपभोक्ता के इलाज पर हुए कुल खर्च को 7% वार्षिक ब्याज दर के साथ अदा करे। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 15 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के तौर पर भी दिए जाने का आदेश दिया गया है। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
