मुजफ्फरपुर में टीबी उन्मूलन अभियान: 160 पंचायतों में घर-घर जाकर होगी जांच
मुजफ्फरपुर जिले को क्षय रोग (टीबी) मुक्त बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। इस वर्ष एक व्यापक अभियान के तहत जिले की 160 पंचायतों में घर-घर जाकर टीबी के संदिग्ध मरीजों की पहचान की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य टीबी के किसी भी संभावित मामले को शुरुआती चरण में ही पकड़कर उसका समुचित उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके और जिले को टीबी मुक्त बनाया जा सके।
अभियान के तहत, स्वास्थ्य कर्मियों की विशेष टीमें प्रत्येक गांव और वार्ड में भ्रमण करेंगी। इन टीमों द्वारा घर-घर जाकर लोगों से टीबी के लक्षणों के बारे में पूछताछ की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं, तो उसकी तत्काल जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि होने पर, मरीज को तत्काल मुफ्त दवा उपलब्ध कराई जाएगी और उसके उपचार की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
जिला यक्ष्मा उन्मूलन पदाधिकारी के अनुसार, जिले को टीबी उन्मूलन का एक निर्धारित लक्ष्य दिया गया है, और इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह पंचायत स्तर पर एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। पिछले वर्ष भी 10 चयनित पंचायतों में इसी तरह का विशेष अभियान चलाया गया था, जिसमें कई टीबी मरीजों की पहचान कर उनका उपचार सफलतापूर्वक सुनिश्चित किया गया था। इस वर्ष, हर प्रखंड से औसतन 10-10 पंचायतों को इस अभियान के लिए चुना गया है, जहां खोज अभियान लगातार जारी रहेगा।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रूप से इस निगरानी अभियान को चलाने का निर्देश दिया है। अभियान की प्रगति पर बारीकी से नजर रखने के लिए, प्रत्येक दिन संदिग्ध व्यक्तियों की सूची, उनकी जांच रिपोर्ट और नए पाए गए टीबी मरीजों का पूरा डाटा जिला मुख्यालय को भेजना अनिवार्य होगा। मुख्यालय स्तर पर एक समर्पित टीम इस पूरे अभियान की निरंतर निगरानी करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी संभावित मरीज जांच या उपचार से वंचित न रह जाए।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, टीबी के प्रमुख लक्षणों में लगातार दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहना, खांसी के साथ बलगम या खून आना, विशेषकर शाम के समय बुखार बने रहना, अचानक वजन कम होना, भूख न लगना, अत्यधिक कमजोरी महसूस होना और रात में पसीना आना शामिल हैं। यदि किसी व्यक्ति में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देता है, तो उसे तुरंत स्वास्थ्य विभाग की टीम से संपर्क करना चाहिए। विभाग का लक्ष्य है कि एक भी संभावित मरीज बिना जांच और उपचार के न छूटे, ताकि जिले में टीबी उन्मूलन के निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा किया जा सके।
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