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संभल: सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन का एक्शन, 12 मकानों पर चला बुलडोजर

By Nov 21, 2025

संभल जिले के तहसील क्षेत्र के गांव हसनपुर मुंजब्ता में सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी रही। राजस्व विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर 90 बीघा सरकारी भूमि को चिन्हित किया और इस पर बने 12 अवैध मकानों को चिन्हित कर उन पर लाल निशान लगा दिए हैं। तहसीलदार ने कब्जाधारियों को जल्द से जल्द अपने मकान खाली करने के निर्देश जारी किए हैं।

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में की गई एक शिकायत के बाद शुरू हुई है। राष्ट्रीय योगी किसान बिग्रेड के ब्रज प्रांत अध्यक्ष गोपीचंद प्रजापति ने 15 अक्टूबर को शिकायत की थी कि हसनपुर मुंजब्ता में ग्राम समाज भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए गए हैं। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से भूमि की पैमाइश शुरू कराई और कब्जा हटाने के लिए 13 सदस्यीय एक विशेष टीम का गठन किया।

गुरुवार को नायब तहसीलदार अरविंद कुमार सिंह के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर चिन्हित स्थलों से कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। प्रारंभिक कार्रवाई में, टीम ने 12 बीघा सरकारी भूमि पर उगाई गई आलू की फसल को ट्रैक्टर-हैरो चलवाकर नष्ट करा दिया था। यह अवैध खेती लंबे समय से ग्राम समाज और अन्य सरकारी भूमि पर की जा रही थी। इसके अलावा, 10 बीघा से अधिक क्षेत्र में फैले तीन तालाबों को भी चिन्हित किया गया है, जिन पर भी अवैध कब्जे थे।

शुक्रवार को कार्रवाई के दूसरे दिन, टीम ने खाद के गड्ढों पर बने 12 और मकानों को चिन्हित कर उन पर लाल निशान लगाए। साथ ही, इन मकानों में रहने वाले कब्जाधारियों को मकान खाली कराने के लिए नोटिस दिए जाने की कार्रवाई की जा रही है। इस राजस्व विभाग की टीम में राजस्व निरीक्षक उरमान सिंह, क्षेत्रीय लेखपाल हेमंत कुमार, मुकेश शर्मा, दिगपाल सिंह, हिमांशु सिंह, सरजीत सिंह, जीतपाल सिंह, शाहबाज आलम, राजीव कुमार, स्पर्श गुप्ता, ज्ञानेश कुमार, एंटोनी सहित कई अन्य लेखपाल शामिल थे।

हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया है। हसनपुर मुंजब्ता गांव के दर्जनों ग्रामीण शुक्रवार को तहसील पहुंचे और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 40 वर्ष पहले उन्हें जिस भूमि पर पट्टे आवंटित किए गए थे, अब उसी पर राजनीति के चलते कार्रवाई की जा रही है और दलित समाज के लोगों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।

गांव निवासी रविशंकर भारती ने उपजिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपकर बताया कि ये आवासीय पट्टे विभाग द्वारा वर्ष 1965, 1973, 1988 व 1990 में नसबंदी और भूमिहीनों को आवंटित किए गए थे। उनका आरोप है कि अब ग्राम स्तर की राजनीतिक खींचतान के कारण दलित बस्ती के लोगों को इन पट्टों से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव में पहले राशन की दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति की दुकान किसी अन्य को दिए जाने के बाद हुई दुश्मनी के कारण यह कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि पट्टा धारक भूमिहीन हैं, इसलिए उनकी बात सुनी जाए और उन्हें बेवजह बेदखल न किया जाए। इस विरोध प्रदर्शन में लक्ष्मी, रामवती, जवित्री, मालती, मोरकली, अंगूरी, इंद्रवती, प्रताप सिंह, धर्मपाल सिंह, जयप्रकाश, किशनपाल, श्रीराम, ओमपाल, खेमपाल सिंह, सोनू, पप्पू सहित कई अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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