ब्रिटेन की नई कठोर आव्रजन नीति: प्रवासियों पर बड़ा असर, भारतीयों को भी पड़ेगा झेलना
ब्रिटेन में प्रवासन को लेकर सरकार ने एक नई और बेहद सख्त नीति का ऐलान किया है, जिसका असर खासकर प्रवासियों पर पड़ेगा, जिसमें भारतीय भी शामिल हो सकते हैं। होम सेक्रेटरी शबाना महमूद ने संसद में इस नई शरणार्थी नीति का पुरजोर बचाव किया। इस नीति के तहत शरणार्थियों के दर्जे को अस्थायी बना दिया गया है, अपील की प्रक्रिया को सीमित कर दिया गया है और सरकारी फंडिंग को खत्म करने का प्रावधान है।
इस नीति में यह भी कहा गया है कि जो देश अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार करेंगे, उन पर वीजा प्रतिबंध लगाए जाएंगे। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शबाना महमूद, जो खुद एक पाकिस्तानी प्रवासी की बेटी हैं और पहले इजरायल विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं, अब सरकार की इस कठोर नीति का बचाव कर रही हैं।
इस नई नीति की लेबर पार्टी के भीतर से ही आलोचना हो रही है। कुछ नेताओं ने इसे ‘डिस्टोपियन’ और ‘नैतिक रूप से गलत’ बताया है। वहीं, दक्षिणपंथी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने होम सेक्रेटरी के इस कदम की खुलकर तारीफ की है। कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बेडेनोक ने इसे ‘सकारात्मक शुरुआती कदम’ बताया, जबकि रिफॉर्म यूके के नेता निगेल फराज ने मजाक में कहा कि महमूद शायद उनकी पार्टी में शामिल होने के लिए ‘ऑडिशन’ दे रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रवासन को लेकर बढ़ते दबाव और रिफॉर्म यूके जैसी पार्टियों के बढ़ते प्रभाव के कारण लेबर सरकार को यह कठोर कदम उठाना पड़ा है। यह नीति 2019 में डेनमार्क में लागू की गई नीतियों से मिलती-जुलती है, जिसके तहत शरणार्थियों को स्थायी निवास के लिए 20 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है और उनके देश को ‘सुरक्षित’ माने जाने पर उन्हें वापस भेजा जा सकता है।
नई योजना के तहत, शरण चाहने वालों की उम्र वेरिफाई करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाएगा, खासकर उन लोगों के लिए जो खुद को नाबालिग बताते हैं। इसके अलावा, नकली दस्तावेजों के इस्तेमाल को रोकने के लिए डिजिटल आईडी कार्ड लागू करने की भी योजना है, जो भारत के आधार कार्ड की तरह काम करेगा।
शरणार्थियों को मिलने वाली टैक्सपेयर से आर्थिक सहायता भी बंद की जा सकती है। जिन शरणार्थियों के पास संपत्ति है, उन्हें अपने रहने का खर्च खुद उठाना होगा। यह डेनमार्क के मॉडल का अनुसरण करता है, जहां अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर शरणार्थियों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार है।
ब्रिटेन में प्रवासन का मुद्दा दशकों से गरमाया हुआ है, खासकर फ्रांस से इंग्लिश चैनल पार करके छोटे नावों में आने वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। इस साल के पहले छह महीनों में 43,000 लोग ऐसे खतरनाक रास्तों से ब्रिटेन पहुंचे, जो पिछले साल की तुलना में 38% अधिक है। इनमें ज्यादातर अफगानिस्तान, ईरान, इरीट्रिया, सूडान और सीरिया जैसे देशों से आए लोग शामिल हैं।
