कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में भर्ती अटकी, बेसिक शिक्षा मंत्री ने जताई नाराजगी
उत्तर प्रदेश में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया महीनों से अटकी हुई है, जिससे इन विद्यालयों में शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने हाल ही में हुई एक समीक्षा बैठक में इस देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं। इस निर्देश के बाद विभाग ने सभी जिलों को लंबित पदों पर शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया संपन्न करने का आदेश दिया है।
प्रदेश भर में कुल 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पदों पर 11 माह 29 दिन के संविदा आधार पर नियुक्ति की जाती है। इसके लिए जिला स्तर पर विज्ञापन जारी कर आवेदन मांगे जाते हैं और मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देती है। हालांकि, कई जिलों में यह प्रक्रिया अब तक शुरू ही नहीं हो पाई है, जिसके कारण विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या लगातार घट रही है और शिक्षण व्यवस्था बाधित हो रही है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 10 जिलों में भर्ती की स्थिति सबसे खराब है। गोरखपुर जिले में शिक्षकों के सर्वाधिक 127 पद खाली हैं। इसके अलावा, बलरामपुर में 83, रायबरेली में 73, अलीगढ़ और गाजीपुर में 67-67, प्रयागराज में 58, भदोही में 57, महोबा में 56, एटा में 54 और बस्ती में 51 पद रिक्त बताए गए हैं। इन जिलों ने जनवरी 2025 से नवंबर 2025 के बीच अलग-अलग तारीखों में विज्ञापन जारी किए थे, लेकिन जिला चयन समितियों द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया गया।
वहीं, कुछ जिले इस मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। अंबेडकरनगर, जौनपुर और कुशीनगर में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एक भी पद खाली नहीं है। गौतमबुद्धनगर, कानपुर देहात और श्रावस्ती में दो-दो, ललितपुर और मैनपुरी में तीन-तीन, जबकि बागपत और रामपुर में पांच-पांच रिक्त पद ही शेष हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना किसी अनावश्यक देरी के पूरी भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। लंबे समय तक पदों का रिक्त रहना कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में शैक्षिक गतिविधियों पर सीधा नकारात्मक प्रभाव डालता है, जो कि बालिकाओं की शिक्षा के भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
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