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दहेज हत्या: मां-बेटे को कोर्ट ने सुनाई सात-सात साल की सजा, पांच हजार का जुर्माना

By Nov 18, 2025

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दहेज हत्या के एक जघन्य मामले में दोषी मां-बेटे को सात-सात साल की कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला सहावर थाना क्षेत्र के गांव जधई निवासी नाथूराम की 22 वर्षीय बेटी किरन उर्फ पिंकी की दहेज के लिए हुई हत्या के संबंध में सुनाया गया है।

सहावर पुलिस के अनुसार, नाथूराम ने 17 अगस्त 2018 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि चार वर्ष पूर्व उन्होंने अपनी बेटी किरन का विवाह सहावर के गांव नगला रसिक निवासी गवेंद्र के साथ किया था। विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग किरन से अतिरिक्त दहेज की मांग कर रहे थे। उनकी मांग में एक बाइक और सोने की अंगूठी शामिल थी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जब उनकी दहेज की मांग पूरी नहीं हुई, तो ससुराल वालों ने मिलकर उसकी बेटी किरन के साथ मारपीट की और उसकी हत्या कर दी। नाथूराम को अपनी बेटी का शव जिला अस्पताल में मिला था।

नाथूराम की तहरीर पर पुलिस ने बेटी के पति गवेंद्र, सास किरन पत्नी करन सिंह और अन्य अज्ञात ससुराल वालों के खिलाफ दहेज हत्या और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी पति गवेंद्र और सास किरन देवी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था।

मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुतोष कुमार शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद यह पाया कि पिंकी की हत्या दहेज की मांग पूरी न होने पर की गई थी। अदालत ने पति गवेंद्र और सास किरन देवी को इस जघन्य अपराध का दोषी पाते हुए सात-सात साल की सजा का ऐलान किया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए सहायक शासकीय अधिवक्ता संदीप मिश्रा ने अदालत में मजबूत पक्ष रखा।

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